गोरखपुर में समाजवादी पार्टी की प्रेसवार्ता के दौरान शुरू हुआ कुर्सी का विवाद अब काफी आगे निकल चुका है. शनिवार को गोरखपुर प्रेस क्लब में बैठने की जगह को लेकर शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते गाली-गलौज और हाथापाई में बदल गई. इसके बाद कैंट थाने में दोनों पक्षों की ओर से मुकदमे दर्ज हो गए. सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और सपा नेता काजल निषाद समेत 12 लोगों पर केस हुआ है. दूसरी तरफ पूर्व जिलाध्यक्ष रामनगीना साहनी की तहरीर पर अंशुमान सिंह, उनके बेटों समेत 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज है.
गोरखपुर प्रेस क्लब के इस विवाद में अब सिर्फ मारपीट की जांच नहीं चल रही, बल्कि कार्रवाई का दायरा भी बढ़ता दिखाई दे रहा है. यही इस पूरे मामले की सबसे खास बात है. पुलिस गिरफ्तारी के लिए चार टीमें लगाकर दबिश दे रही है और एक आरोपित को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है. इसी बीच अंशुमान सिंह के शस्त्र लाइसेंस के निरस्तीकरण की कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है. यानी गोरखपुर में एक प्रेसवार्ता के दौरान कुर्सी को लेकर उठा विवाद अब थाने, पुलिस जांच और लाइसेंस की कार्रवाई तक पहुंच चुका है.

पहली तहरीर में बारह नाम
गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकारधर द्विवेदी की तहरीर पर कैंट पुलिस ने पहला मुकदमा दर्ज किया है. इसमें सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम, महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, पूर्व मंत्री मोहसिन खान, पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव और सपा नेता काजल निषाद समेत 12 लोगों के नाम शामिल हैं. तहरीर में मारपीट, बलवा, गाली-गलौज और धमकी के आरोप लगाए गए हैं. इसमें कुछ लोगों के असलहा लेकर प्रेस क्लब पहुंचने का आरोप भी लगाया गया है, हालांकि यह आरोप पुलिस जांच का विषय है. यही वजह है कि गोरखपुर कैंट पुलिस अब पूरे घटनाक्रम को खंगाल रही है.

दूसरी तरफ दूसरी FIR दर्ज
कहानी यहीं नहीं रुकी. पूर्व जिलाध्यक्ष रामनगीना साहनी की ओर से भी कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया. इस FIR में सपा से निष्कासित किए जा चुके अंशुमान सिंह, उनके बेटे कमलेश सिंह और विमलेश सिंह समेत 12 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है. इस मुकदमे में हत्या के प्रयास, मारपीट और बलवा जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. दरअसल, विवाद के दौरान अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह पर रामनगीना साहनी को थप्पड़ मारने का आरोप लगा था. घटना के बाद प्रेस क्लब में अफरा-तफरी मची और पत्रकारों को भी वहां से हटना पड़ा.
लाइसेंस पर भी अब कार्रवाई
दोनों मुकदमों के बाद अब पुलिस की कार्रवाई एक और तरफ बढ़ रही है. एसपी सिटी निमिष पाटील के मुताबिक, प्रेस क्लब अध्यक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है और पूर्व जिलाध्यक्ष की ओर से भी केस दर्ज हुआ है. पुलिस के अनुसार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें दबिश दे रही हैं. इसी बीच हत्या के प्रयास, मारपीट और धमकी वाले मुकदमे का हवाला देते हुए अंशुमान सिंह के शस्त्र लाइसेंस के निरस्तीकरण की कार्रवाई की तैयारी है. विवेचक की ओर से जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजे जाने की बात सामने आई है. पुलिस अंशुमान सिंह और उनके दोनों बेटों के खिलाफ दर्ज दूसरे मुकदमों का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है.
पार्टी के भीतर भी बड़ा असर
अब जरा इस पूरे घटनाक्रम को आगे जोड़कर देखिए. विवाद की शुरुआत सपा जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम की प्रेसवार्ता में बैठने की व्यवस्था को लेकर बताई जा रही है. इसी दौरान अंशुमान सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और पूर्व जिलाध्यक्ष रामनगीना साहनी के बीच बैठने की जगह को लेकर विवाद हुआ. कहासुनी बढ़ी, गाली-गलौज हुई और फिर हाथापाई शुरू हो गई. घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आया. इसके बाद समाजवादी पार्टी ने अंशुमान सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया. यानी प्रेस क्लब की घटना का असर पार्टी के अंदर भी दिखाई देने लगा.

अब संगठन पर भी गिरी गाज
विवाद का अगला बड़ा असर तब दिखा, जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला और महानगर कार्यकारिणी समेत कई संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया. इस तरह जो मामला शुरुआत में प्रेस क्लब के भीतर कुर्सी पर बैठने की व्यवस्था से जुड़ा नजर आ रहा था, वह धीरे-धीरे पुलिस कार्रवाई और पार्टी संगठन तक पहुंच गया. एक तरफ दोनों पक्षों की FIR की जांच चल रही है, दूसरी तरफ गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं. वहीं शस्त्र लाइसेंस को लेकर भी कार्रवाई की तैयारी है. गोरखपुर की इस घटना में अब हर अगला कदम पिछले कदम से जुड़ता दिखाई दे रहा है.
कुर्सी से निकला विवाद बढ़ा
गोरखपुर प्रेस क्लब का यह विवाद अब सिर्फ कुर्सी और थप्पड़ की घटना भर नहीं रह गया है. एक तरफ प्रेस क्लब अध्यक्ष की तहरीर पर 12 लोगों के खिलाफ केस है, तो दूसरी तरफ रामनगीना साहनी की तहरीर पर अंशुमान सिंह, उनके दोनों बेटों और 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है. पुलिस गिरफ्तारी के लिए चार टीमें लगा चुकी है और एक आरोपित को हिरासत में लिए जाने की जानकारी है. दूसरी ओर अंशुमान सिंह के शस्त्र लाइसेंस के निरस्तीकरण की तैयारी और सपा की जिला-महानगर कमेटियों को भंग किए जाने से मामला और बड़ा हो गया है. फिलहाल कैंट पुलिस दोनों मुकदमों की जांच कर रही है और आरोपितों की तलाश जारी है.





