Caracas Earthquake: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला बुधवार शाम उस समय दहल उठा, जब कुछ ही सेकेंड के अंतराल में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए. अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार दोनों भूकंप राजधानी कराकस से करीब 290 किलोमीटर पश्चिम में आए और उनकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरे देश में दहशत फैल गई. सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लोग घरों, दफ्तरों और मॉल से निकलकर खुले मैदानों की ओर भागने लगे. विशेषज्ञों का कहना है कि यह वेनेजुएला में पिछले 126 वर्षों में आया सबसे शक्तिशाली भूकंप है, जिसने देश के कई हिस्सों को गहरे संकट में डाल दिया है.
भूकंप का सबसे ज्यादा असर राजधानी कराकस और आसपास के इलाकों में देखा गया. कई बहुमंजिला इमारतों में दरारें आ गईं, कुछ इमारतें पूरी तरह ढह गईं और कई आवासीय तथा व्यावसायिक परिसरों को भारी नुकसान पहुंचा. कराकस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की छत का हिस्सा गिरने की खबर भी सामने आई, जिसके बाद हवाई सेवाओं को प्रभावित क्षेत्रों में सीमित करना पड़ा. बिजली और संचार सेवाओं में भी रुकावटें आईं. स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार नुकसान का आकलन कर रही हैं, जबकि हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा रहे हैं.
अब तक 32 लोगों की मौत
अब तक सामने आई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक कम से कम 32 लोगों की मौत हो चुकी है और 700 से अधिक लोग घायल हुए हैं. हालांकि यह संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि कई इलाकों में मलबे के नीचे लोगों के फंसे होने की सूचना है. USGS के प्रारंभिक आकलन के अनुसार मौतों का आंकड़ा हजारों तक पहुंच सकता है. एजेंसी ने 10 हजार से अधिक मौतों की 44 प्रतिशत और एक लाख से ज्यादा मौतों की 30 प्रतिशत संभावना जताई है. हालांकि यह केवल शुरुआती वैज्ञानिक अनुमान हैं और वास्तविक आंकड़े राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे.
राष्ट्रीय आपातकाल घोषित
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है. सरकार ने प्रभावित इलाकों में गैस सप्लाई अस्थायी रूप से बंद कर दी है ताकि गैस रिसाव या विस्फोट जैसी घटनाओं को रोका जा सके. गृह मंत्री डियोसदादो काबेलो ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है. राहत दल, सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने में जुटी हुई हैं. कई देशों ने भी वेनेजुएला को मदद की पेशकश की है.
पीएम मोदी ने जताई चिंता
भारत ने भी इस आपदा पर संवेदना व्यक्त की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के लोगों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस भूकंप को लेकर चिंता जताई जा रही है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े भूकंप के बाद आने वाले आफ्टरशॉक्स स्थिति को और कठिन बना सकते हैं, इसलिए आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे.
आखिर भूकंप क्यों आते हैं?
आखिर इतने बड़े भूकंप आते क्यों हैं? वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की सतह कई विशाल टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है, जो लगातार गतिशील रहती हैं. जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या एक-दूसरे पर दबाव बनाती हैं, तो धरती के भीतर ऊर्जा जमा होने लगती है. दबाव सीमा से अधिक होने पर यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है और भूकंप के रूप में धरती हिलने लगती है. वेनेजुएला में आए इन दो शक्तिशाली झटकों ने एक बार फिर दिखा दिया कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने आधुनिक शहर भी कितने असुरक्षित हो सकते हैं. जिस तरह हमारे यहां उत्तराखंड, हिमाचल या दिल्ली-एनसीआर में भूकंप को लेकर सतर्कता की जरूरत होती है, उसी तरह दुनिया के हर भूकंप संभावित क्षेत्र में मजबूत निर्माण और आपदा तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है.











