17 दिसंबर 1995 की वो रात आज भी भारत के सबसे बड़े रहस्यों में गिनी जाती है। एक विदेशी विमान पाकिस्तान की दिशा से भारत के अंदर दाखिल होता है। हैरानी की बात ये थी कि विमान सैकड़ों किलोमीटर तक भारतीय सीमा के अंदर उड़ता रहा, रास्ते में ईंधन भरवाया और फिर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के आसमान से भारी मात्रा में हथियार गिराकर आराम से निकल गया।
ये कोई फिल्मी कहानी नहीं थी, बल्कि एक सच्ची घटना थी जिसने पूरे देश को हिला दिया था।
बताया जाता है कि उस विमान से सैकड़ों AK-47 राइफलें, रॉकेट लॉन्चर, ग्रेनेड और लाखों गोलियां गिराई गई थीं। सवाल ये उठा कि आखिर इतने बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने वालों को भारत की सुरक्षा एजेंसियां रोक क्यों नहीं पाईं?
सबसे बड़ा रहस्य ये था कि विमान पहली बार बिना किसी रुकावट के निकल गया, लेकिन जब वही विमान कुछ दिनों बाद दोबारा भारत आया तो उसे तुरंत पकड़ लिया गया। आखिर पहली बार कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इस मामले में विदेशी नागरिक किम डेवी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया। उस पर आरोप लगे कि उसने पूरे ऑपरेशन की योजना बनाई थी। लेकिन बाद में वह भारत से निकलकर इंग्लैंड पहुंच गया। आज तक भारत उसे वापस नहीं ला पाया।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI5 को इस ऑपरेशन की जानकारी पहले से थी। हालांकि इसकी कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। लेकिन अगर जानकारी थी, तो सवाल उठता है कि विमान को रोका क्यों नहीं गया?
आज करीब 30 साल बाद भी ये सवाल लोगों के मन में जिंदा हैं—
- हथियार किसके लिए भेजे गए थे?
- क्या इसके पीछे कोई आतंकी साजिश थी?
- क्या किसी बड़े नेटवर्क को बचाया गया?
- आखिर सुरक्षा एजेंसियों से इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
पुरुलिया हथियार कांड सिर्फ हथियार गिराने की घटना नहीं थी। ये भारत की सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया तंत्र और राजनीतिक रहस्यों से जुड़ा ऐसा मामला बन गया जिसने आज तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आने दी।













