PM Modi Dimaagi Naxal Statement: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए ‘दिमागी नक्सलियों’ को लेकर बड़ा बयान दिया. पीएम ने कहा कि हथियार उठाने वाले नक्सलियों से देश काफी हद तक निपट चुका है, लेकिन अब ऐसी मानसिकता रखने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे तत्व समाज और खासकर युवाओं को भटकाने तथा अराजकता फैलाने के मौके तलाशते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानकर अलग-थलग करना जरूरी है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सली’ किसे कहा? भाषण में पीएम मोदी ने राहुल गांधी, कांग्रेस या किसी दूसरे नेता का नाम नहीं लिया. इसलिए सीधे तौर पर यह कहना कि उन्होंने राहुल गांधी को ‘दिमागी नक्सली’ कहा, सही नहीं होगा. प्रधानमंत्री ने इसे किसी व्यक्ति के बजाय एक ऐसी विचारधारा के संदर्भ में इस्तेमाल किया, जिसके बारे में उनका कहना था कि वह युवाओं और समाज को गलत दिशा में ले जाने का काम करती है.
बिना नाम लिए क्या बोले पीएम
इसी बीच ‘कॉकरोच’ नाम को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है. ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक समूह और उससे जुड़े छात्र आंदोलन का जिक्र अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आया है. लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी और पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ बयान को एक ही बात मान लेना ठीक नहीं है. दोनों संदर्भ अलग हैं. यानी इस बयान को राहुल गांधी या कॉकरोच समूह के लिए सीधे तौर पर दिया गया बयान बताने के बजाय प्रधानमंत्री की व्यापक वैचारिक टिप्पणी के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा.
समाज को लेकर दिया संदेश
पीएम मोदी का संदेश साफ तौर पर युवाओं और समाज को लेकर था. उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सलवाद कमजोर हुआ है, लेकिन विचारों के स्तर पर मौजूद चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि ‘दिमागी नक्सली’ वाला उनका बयान स्वतंत्रता दिवस के भाषण के सबसे चर्चित हिस्सों में शामिल हो गया. हालांकि, प्रधानमंत्री ने इसकी कोई कानूनी या औपचारिक परिभाषा नहीं बताई और न ही किसी व्यक्ति या संगठन की पहचान सार्वजनिक तौर पर की. वहीं कांग्रेस महासचिव ने भी ट्वीट कर कहा कि पीएम की हताशा दिख रही है.

किस पर पीएम का निशाना?
ऐसे में सोशल मीडिया की चर्चाओं से अलग खबर का तथ्य यही है कि PM मोदी ने किसी का नाम लेकर ‘दिमागी नक्सली’ नहीं कहा. उन्होंने एक ऐसी मानसिकता पर निशाना साधा, जिसे वे समाज और युवाओं को भटकाने वाली मानते हैं. अब इस बयान के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं और विपक्षी नेताओं को इससे जोड़कर चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन बिना पीएम के किसी नाम लेने के किसी खास नेता को इसका निशाना बताना सिर्फ अनुमान होगा.





