रबी अभियान 2026-27 को लेकर केंद्र की तैयारी
नई दिल्ली। रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार की तैयारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों की जानकारी दी। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने किसानों के लिए खाद, बीज, वित्तीय संसाधन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों का ब्योरा दिया।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, रबी सीजन के लिए देश में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इस समय देश में 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का स्टॉक मौजूद है। राज्यों ने रबी सीजन 2026-27 के लिए कुल 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग रखी है।
रबी उत्पादन का 177.72 मिलियन टन लक्ष्य
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए देश में कुल 373.93 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए 362.60 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य था, जबकि किसानों ने 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन किया।
22 अक्टूबर से ‘खेत बचाओ अभियान’
कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को संतुलित मात्रा में खाद के इस्तेमाल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार खेती के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा।
इस अभियान में आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, ATMA की टीमें तथा राज्य और केंद्र के कृषि विभाग के अधिकारी गांवों और खेतों तक पहुंचेंगे।
अभियान के दौरान मिट्टी की जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी के इस्तेमाल, उपलब्ध पानी और नमी के आधार पर फसल चयन तथा किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़े मामलों पर भी काम किया जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट में खाद की खपत में कमी
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान कुछ राज्यों के दो-दो जिलों में संतुलित उर्वरक उपयोग का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था। उनके अनुसार, मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद के इस्तेमाल से इन जिलों में उर्वरक की कुल खपत में 27 प्रतिशत की कमी आई और 1400 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई।
कृषि मंत्री ने कहा कि इस मॉडल को अब व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
बारिश और अल-नीनो की चुनौती पर सरकार की तैयारी
कृषि मंत्री ने मानसून और अल-नीनो की संभावित चुनौती का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मानसूनी बारिश में शुरुआती दौर में 14 प्रतिशत की कमी थी, जो बाद की बारिश के बाद घटकर 12 प्रतिशत रह गई।
उन्होंने कहा कि कम बारिश की आशंका के बावजूद खरीफ फसलों के कुल बुवाई क्षेत्र में लगभग 1 प्रतिशत की ही कमी आई। हालांकि धान के बुवाई क्षेत्र में लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर की कमी बताई गई।
वहीं उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर जैसी फसलों के रकबे में बढ़ोतरी की जानकारी दी गई।

बाढ़ और सूखे से प्रभावित राज्यों में जाएंगी केंद्रीय टीमें
कृषि मंत्री के अनुसार कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश, बाढ़ या सूखे के कारण लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक जानकारी मिली है।
स्थिति का आकलन करने के लिए 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगी। इसके बाद नुकसान का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन कराया जाएगा।
उन्होंने SDRF और NDRF के माध्यम से प्रभावित राज्यों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी।
MSP से नीचे दाम पर दाल-तिलहन खरीद की व्यवस्था
कृषि मंत्री ने दलहन और तिलहन किसानों के लिए भी खरीद व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि बाजार में इन फसलों की कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से नीचे जाती है तो NAFED और NCCF सीधे मंडियों में जाकर खरीद शुरू कर सकेंगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की स्थिति से बचाना बताया गया है।
एग्रीस्टैक और Farmer ID पर जोर
कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी गई। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों की विशिष्ट Farmer ID बनाने का काम चल रहा है।
एग्रीस्टैक के माध्यम से सरकारी योजनाओं और कृषि संबंधी तकनीकी सलाह किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
पराली और प्रदूषण को लेकर कृषि मंत्री का बयान
दिल्ली-NCR में प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दे पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
उनके अनुसार, वर्ष 2019-20 में प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत बताई गई थी, जो अब लगभग 2.5 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने कहा कि किसानों से संवाद और उन्हें आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराकर समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
खाद और किसानों की लागत को लेकर सरकार का दावा
कृषि मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का वित्तीय बोझ भारतीय किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा और राज्यों की मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
कुल मिलाकर, रबी अभियान 2026-27 के तहत सरकार ने उत्पादन लक्ष्य, खाद की उपलब्धता, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक आपदाओं से राहत और किसानों को बाजार मूल्य से सुरक्षा देने से जुड़े कई उपायों की जानकारी दी है।





