समाजवादी पार्टी की कैराना सांसद इकरा हसन को मंगलवार 19 मई 2026 को सहारनपुर में सड़क जाम और यातायात बाधित करने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया। हालांकि कुछ ही मिनटों बाद उन्हें छोड़ दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
इकरा हसन मोनू कश्यप हत्याकांड में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पीड़ित परिवार के साथ सहारनपुर डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं। इस दौरान पुलिस और सांसद समर्थकों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
मोनू कश्यप हत्याकांड को लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंचीं इकरा हसन
शामली जिले के जसाला गांव निवासी मोनू कश्यप की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। परिवार का आरोप है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है और एफआईआर में कुछ अन्य नाम भी शामिल किए जाने चाहिए।
इसी मांग को लेकर सांसद इकरा हसन मृतक की मां और अन्य लोगों के साथ सहारनपुर डीआईजी कार्यालय पहुंचीं। वहां उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग रखी।
डीआईजी पर गंभीर आरोप
इकरा हसन का आरोप है कि डीआईजी ने पीड़ित महिला की बात को गंभीरता से नहीं सुना। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों का व्यवहार पीड़ित परिवार के प्रति संवेदनशील नहीं था।
सांसद के अनुसार, बातचीत के बाद वे कार्यालय परिसर के पार्किंग एरिया में बैठ गईं और प्रशासन के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने लगीं। इसी दौरान महिला थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई।
पुलिस ने सड़क जाम का लगाया आरोप
सहारनपुर पुलिस प्रशासन का कहना है कि डीआईजी कार्यालय से बाहर आने के बाद सांसद और उनके समर्थकों ने सड़क जाम करने तथा यातायात बाधित करने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए इकरा हसन को महिला थाने ले जाया गया।
पुलिस ने दावा किया कि उन्हें करीब 10 मिनट तक हिरासत में रखा गया, जिसके बाद छोड़ दिया गया।
इकरा हसन ने पुलिस के दावे को बताया गलत
दूसरी ओर, इकरा हसन ने पुलिस प्रशासन के आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि वे केवल पार्किंग एरिया में मौजूद थीं और किसी प्रकार का सड़क जाम नहीं किया गया।
सांसद का कहना है कि पुलिस प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और पीड़ित परिवार की आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
समर्थकों की गिरफ्तारी से बढ़ा विवाद
घटना के बाद पुलिस ने पूर्व राज्यमंत्री मांगेराम कश्यप समेत इकरा हसन के 4 से 5 समर्थकों को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
इस कार्रवाई के विरोध में इकरा हसन देर रात सदर बाजार पुलिस स्टेशन पहुंचीं और वहीं धरने पर बैठ गईं। उन्होंने मांग की कि या तो उनके समर्थकों को तुरंत रिहा किया जाए या फिर उन्हें भी जेल भेजा जाए।
देर रात खत्म हुआ धरना
काफी देर तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार समर्थकों को जमानत मिल गई। इसके बाद इकरा हसन ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल
इकरा हसन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सक्रिय युवा नेताओं में गिनी जाती हैं। ऐसे में सहारनपुर की यह घटना राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।
Conclusion
सहारनपुर में इकरा हसन को हिरासत में लिए जाने और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। जहां पुलिस सड़क जाम और शांति भंग करने के आरोप लगा रही है, वहीं सांसद इकरा हसन इसे प्रशासन की मनमानी बता रही हैं। मोनू कश्यप हत्याकांड की निष्पक्ष जांच की मांग के बीच यह विवाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।














