इतिहास रचने वाला क्षण
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जुलाई 2022 का दिन बेहद खास माना जाता है। इसी दिन द्रौपदी मुर्मू ने देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनकर नया इतिहास रच दिया। उनके राष्ट्रपति बनने से देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समावेश का भी प्रतीक मानी गई। उनके शपथ ग्रहण समारोह पर पूरे देश की नजरें टिकी थीं।
कौन हैं द्रौपदी मुर्मू
द्रौपदी मुर्मू का जन्म ओडिशा के मयूरभंज जिले में हुआ। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत शिक्षक के रूप में की और बाद में राजनीति में सक्रिय हुईं। वे ओडिशा सरकार में मंत्री भी रहीं और बाद में झारखंड की राज्यपाल नियुक्त की गईं। अपने शांत स्वभाव, प्रशासनिक अनुभव और जनसेवा के कारण उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई। लंबे सार्वजनिक जीवन के बाद उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारी मिली।
राष्ट्रपति चुनाव कैसे जीता
राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का उम्मीदवार बनाया गया था। चुनाव में उन्हें विभिन्न राज्यों के विधायकों और सांसदों का व्यापक समर्थन मिला। मतगणना के बाद उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने 25 जुलाई 2022 को संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ ली और आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाला।
क्यों है यह उपलब्धि खास
द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि वे भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं। उनका चुनाव देश के आदिवासी समाज और महिलाओं के लिए प्रेरणादायक माना गया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इससे समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को नई मजबूती मिली। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया कि देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचने के अवसर सभी नागरिकों के लिए खुले हैं।
वायरल पोस्ट की सच्चाई
सोशल मीडिया पर अक्सर द्रौपदी मुर्मू से जुड़ी तस्वीरें और पोस्ट वायरल होती रहती हैं। वायरल पोस्ट में यह जानकारी दी गई है कि वे भारत की पहली आदिवासी महिला और 15वीं राष्ट्रपति बनीं, जो तथ्यात्मक रूप से सही है। हालांकि “नई राष्ट्रपति” और शपथ लेने की तारीख वाला संदर्भ वर्ष 2022 का है। इसलिए यदि यह पोस्ट वर्तमान समय में शेयर की जा रही है तो इसे ऐतिहासिक जानकारी के रूप में समझना चाहिए, न कि वर्तमान समाचार के रूप में।














