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On: July 16, 2026 8:00 PM

E20 पेट्रोल से पहली बार इंजन खराब! रायपुर में कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति को नई कार देने का आदेश

E20 Petrol First Case: रायपुर में E20 पेट्रोल से कार इंजन खराब होने के मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी और डीलर को जिम्मेदार माना. आयोग ने नई E20 अनुकूल कार देने या करीब 20 लाख रुपए लौटाने का आदेश दिया है.

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E20 Petrol
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HIGHLIGHTS

1. E20 पेट्रोल मामले में ग्राहक की बड़ी जीत
2. कोर्ट ने नई कार या ₹20.5 लाख लौटाने का आदेश दिया
3. इंजन खराब होने पर कंपनी और डीलर जिम्मेदार ठहरे
4. लैब जांच में एथेनॉल की परत मिलने की पुष्टि हुई
5. E20 फ्यूल विवाद में देश का पहला बड़ा फैसला आया.

Raipur Maruti Suzuki News: रायपुर में सामने आया एक मामला अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है. पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की सरकारी पहल के बीच एक कार मालिक ने दावा किया कि E20 पेट्रोल के कारण उनकी नई कार का इंजन खराब हो गया. मामला इतना बढ़ा कि उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया. अब कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी और उसके अधिकृत डीलर के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाते हुए ग्राहक को नई कार देने या करीब 20 लाख रुपए लौटाने का आदेश दिया है. E20 फ्यूल से वाहन खराब होने पर उपभोक्ता को राहत मिलने का यह देश का पहला मामला माना जा रहा है.

मामले के केंद्र में रायपुर के रहने वाले डॉ. प्रेमराज देबता हैं. उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी की नेक्सा डीलरशिप से ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस खरीदी थी. डॉ. देबता का कहना है कि रोजाना लंबी दूरी तय करने के कारण उन्होंने हाइब्रिड कार चुनी थी. खरीदारी के दौरान उन्हें बताया गया कि वाहन दिसंबर 2023 में निर्मित है, लेकिन बाद में दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच में यह जानकारी सामने आई कि कार का निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था. इसी बिंदु को भी आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान गंभीरता से लिया.

रास्ते में अचानक बंद हो गया वाहन
कार खरीदने के कुछ महीनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन नवंबर 2024 में अचानक डैशबोर्ड पर इंजन मालफंक्शन का अलर्ट दिखाई दिया और वाहन रास्ते में बंद हो गया. डीलरशिप ने जांच के बाद इसे ईंधन से जुड़ी समस्या बताया और फ्यूल टैंक खाली कराया. टैंक से निकाले गए पेट्रोल में नीचे सफेद रंग का अलग पदार्थ जमा मिला. इसके बाद डॉ. देबता ने पेट्रोल पंप और कंपनी दोनों से शिकायत की. हालांकि शुरुआती जांच में पेट्रोल पंप की ओर से ईंधन को मानक के अनुरूप बताया गया, लेकिन इसके बावजूद कार की तकनीकी समस्याएं लगातार बढ़ती रहीं.

फ्यूल सिस्टम की सफाई नहीं हुई
समस्या खत्म होने की बजाय और गंभीर होती गई. कंपनी ने माना कि पहली बार फ्यूल सिस्टम की पूरी तरह सफाई नहीं हो सकी थी, इसलिए दोबारा सफाई की गई. इसके बावजूद फ्यूल टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में फिर से सफेद परत और तरल पदार्थ मिला. कुछ समय बाद वाहन में दोबारा खराबी आई और इलेक्ट्रिक मोड ने काम करना बंद कर दिया. इंजन पूरी तरह ठप हो गया. कंपनी ने ई-मेल के जरिए बताया कि इंजन बदलना पड़ेगा, जिस पर लगभग 5.30 लाख रुपए का खर्च आएगा और यह वारंटी के दायरे में नहीं होगा. इससे ग्राहक की परेशानी और बढ़ गई.

कंज्यूमर कोर्ट का खटखटाया गेट
इसके बाद कंपनी ने वाहन को ठीक कर वापस सौंपा, लेकिन डीलरशिप के सामने पेट्रोल भरवाने के बाद भी कार करीब 10 किलोमीटर चलकर फिर बंद हो गई. जांच में इस बार भी टैंक के भीतर दही जैसी सफेद परत और तरल पदार्थ मिला. बार-बार एक जैसी समस्या आने के बाद डॉ. देबता ने नई कार देने या पूरी राशि वापस करने की मांग की. जब कंपनी ने यह मांग स्वीकार नहीं की, तब उन्होंने मार्च 2025 में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान ईंधन और वाहन से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं की विस्तार से जांच की गई.

रिपोर्ट ने मामले की दिशा बदली
सरकारी और अधिकृत प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट ने मामले की दिशा बदल दी. जांच में ईंधन में एथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई और यह भी सामने आया कि एथेनॉल अलग होकर नीचे सफेद परत के रूप में जमा हो गया था. आयोग ने माना कि वाहन का इंजन E20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, जबकि देश में E20 फ्यूल उपलब्ध था और उपभोक्ता को इसी माहौल में वाहन बेचा गया. इसी आधार पर आयोग ने आदेश दिया कि 45 दिनों के भीतर ग्राहक को E20 अनुकूल नई कार दी जाए. यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो वाहन की पूरी कीमत, अन्य खर्च और निर्धारित राशि लौटानी होगी. यह फैसला भविष्य में वाहन निर्माताओं और ग्राहकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है.

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