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On: October 5, 2026 1:04 PM

छोटे इमामबाड़े पर आज भी हैं निशान…जानिए 1894 से 2026 तक कब-कब डूबा लखनऊ, ये रहा 132 साल पुराना इतिहास

लखनऊ में 2026 की बाढ़ ने एक बार फिर गोमती नदी के पुराने तेवर याद दिला दिए हैं. फैजुल्लागंज से लेकर कई इलाकों में पानी पहुंचा, लेकिन शहर ने इससे भी बड़ी बाढ़ें देखी हैं. 1894 के ऐतिहासिक निशान से 1971, 1980 और 2008 तक जानिए लखनऊ की बाढ़ का पूरा इतिहास.

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lucknow flood history

लखनऊ में इस बार गोमती नदी ने फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है. सितंबर-अक्टूबर 2026 में नदी का जलस्तर बढ़ा तो फैजुल्लागंज, दाऊदनगर और गोमती रिवर फ्रंट समेत कई इलाके पानी में डूब गए. कहीं 4 से 5 फीट तक पानी पहुंचा तो कहीं लोगों को घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा. करीब 40 हजार घर प्रभावित होने की बात सामने आई. शहर के लोगों के लिए यह मंजर नया जरूर लगा, लेकिन लखनऊ की मिट्टी बाढ़ की ऐसी कहानी पहले भी कई बार देख चुकी है.

बात अगर पुराने लखनऊ की गलियों से शुरू करें तो कहानी काफी पीछे चली जाती है. गोमती नदी के किनारे बसे इस शहर में जब नदी का पानी बढ़ता है तो निचले इलाकों पर असर साफ दिखता है. 2026 की बाढ़ ने करीब 18 साल बाद फिर वैसी गंभीर स्थिति की याद दिलाई. मगर सवाल यही है कि इससे पहले लखनऊ कब-कब पानी में डूबा था? इस सवाल का जवाब शहर के पुराने रिकॉर्ड में छिपा है. कहानी जितनी पीछे जाती है, लखनऊ की बाढ़ का इतिहास उतना ही बड़ा होता जाता है.

1894 का वह ऐतिहासिक निशान
लखनऊ के इतिहासकार बताते हैं कि लखनऊ की बाढ़ का सबसे पुराना यादगार निशान सितंबर 1894 से जुड़ा है. छोटे इमामबाड़े के पास आज भी ‘हाई फ्लड लाइन – सितंबर 1894’ का ऐतिहासिक निशान मौजूद है. यह निशान उस समय आई भीषण बाढ़ के जलस्तर की गवाही देता है. सोचिए, इतने पुराने समय की बाढ़ का निशान आज भी शहर के बीच मौजूद है. यानी लखनऊ और गोमती का यह रिश्ता सिर्फ आज की परेशानी तक सीमित नहीं है. बाढ़ का यह सिलसिला शहर की पुरानी यादों में बहुत पहले से दर्ज है.

1971 में टूटा गोमती तटबंध
1894 की उस पुरानी कहानी के कई दशक बाद सितंबर 1971 में लखनऊ ने फिर बाढ़ का बड़ा रूप देखा. इस बार गोमती नदी का तटबंध टूट गया और शहर का करीब एक चौथाई हिस्सा पानी में डूब गया. रिकॉर्ड में इसे दूसरी सबसे ऊंची बाढ़ बताया गया है. उस समय गोमती नदी में 107,000 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया था. हालात ऐसे थे कि राहत के लिए सेना और नागरिक इंजीनियरों की मदद लेनी पड़ी. शहर ने एक बार फिर नदी का बड़ा रूप सामने से देखा.

ये भी पढ़ेंः लखनऊ बाढ़: बारिश थमी, फिर भी क्यों बढ़ रहा गोमती का जलस्तर? फैजुल्लागंज में 40 हजार घर डूबे

1980 में शहर डूबा गहरे
1971 के बाद कहानी यहीं नहीं रुकी. जुलाई 1980 में लखनऊ ने आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ों में से एक देखी. उस समय डालीगंज, निशातगंज, चौक, ठाकुरगंज और सआदतगंज जैसे इलाके बुरी तरह पानी में डूब गए थे. निचले इलाकों की हालत इतनी खराब थी कि कई घरों की पहली मंजिल तक पानी पहुंच गया था. जिन गलियों में रोजमर्रा की जिंदगी चलती थी, वहां उस वक्त पानी ही पानी दिखाई दे रहा था. यह बाढ़ भी लखनऊ की पुरानी यादों में गहराई से दर्ज हो गई.

2008 में फिर बढ़ा जलस्तर
समय बीतता गया और लखनऊ की जिंदगी फिर सामान्य होती गई. लेकिन गोमती की कहानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई. वर्ष 2008 में भी नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था. उस समय भी गोमती ने अपने बढ़ते पानी से शहर को सावधान किया था. इसके बाद 2026 में एक बार फिर वैसी गंभीर स्थिति देखने को मिली. यानी बाढ़ का इतिहास सिर्फ बहुत पुराने सालों तक सीमित नहीं है. करीब डेढ़ दशक से ज्यादा के अंतराल में शहर ने फिर नदी के बढ़ते पानी का असर महसूस किया.

2026 में फिर लौटी बाढ़
अब लौटते हैं सितंबर-अक्टूबर 2026 में, जब लखनऊ में एक बार फिर गोमती का पानी बढ़ा. फैजुल्लागंज, दाऊदनगर और गोमती रिवर फ्रंट जैसे इलाके जलमग्न हो गए. कई जगह 4 से 5 फीट तक पानी भर गया. करीब 40 हजार घर प्रभावित हुए और हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा. इस बाढ़ को करीब 18 साल बाद आई गंभीर स्थिति के तौर पर देखा गया. यानी 2008 की याद के बाद 2026 में शहर ने फिर वही चिंता अपने सामने खड़ी देखी.

साल बदले, बाढ़ की कहानी
लखनऊ की इस पूरी कहानी को पीछे से देखें तो तस्वीर साफ होती है. सितंबर 1894 में छोटे इमामबाड़े के पास दर्ज हाई फ्लड लाइन, फिर 1971 की तटबंध टूटने वाली बाढ़, 1980 में डूबे पुराने इलाके, 2008 में बढ़ा गोमती का जलस्तर और अब 2026 की बाढ़. साल अलग हैं, हालात अलग हैं, लेकिन गोमती के साथ लखनऊ की बाढ़ की कहानी बार-बार सामने आती रही है. सबसे खास बात यही है कि आज की बाढ़ को समझने के लिए शहर को अपने पुराने इतिहास की ओर देखना पड़ता है.

Source: TV21 Network

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TV 21 Network Desk

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