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On: September 3, 2026 6:01 PM

देवरिया में गोबर से निकली गैस पहुंच रही स्कूल तक, 170 बच्चों के खाने से जुड़ी है पूरी कहानी

Deoria Biogas Plant: देवरिया के पिपरा चंद्रभान में 286 गोवंश के गोबर से बायोगैस बनाई जा रही है. गैस से 170 बच्चों का मिड-डे मील तैयार होता है, जबकि स्लरी से जैविक खाद बनती है. प्लांट से पंचायत को अब तक करीब 46,241 रुपये आय मिली है.

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Deoria Biogas Plant

Deoria News: देवरिया सदर के पिपरा चंद्रभान में गौशाला का गोबर अब सिर्फ कचरा नहीं रह गया है. गांव में स्थापित गोवर्धन बायोगैस प्लांट से इसी गोबर का इस्तेमाल कर गैस तैयार की जा रही है, जो पाइपलाइन के जरिए कंपोजिट विद्यालय तक पहुंच रही है. खास बात यह है कि इसी गैस से स्कूल में पढ़ने वाले करीब 170 बच्चों के लिए मिड-डे मील तैयार किया जा रहा है. यानी गौशाला से निकलने वाला गोबर सीधे स्कूल की रसोई के काम आ रहा है. यहीं से इस पूरी पहल की कहानी सामान्य कचरा प्रबंधन से थोड़ी अलग हो जाती है.

इस प्लांट में गौशाला के करीब 286 गोवंश से मिलने वाले गोबर का इस्तेमाल होता है. रोजाना इकट्ठा होने वाला गोबर पहले संयंत्र के इनलेट टैंक में डाला जाता है. इसके बाद ऑटो मिक्सिंग टैंक और डायजेस्टर के जरिए जैविक प्रक्रिया से बायोगैस तैयार होती है. फिर इस गैस को पाइपलाइन के माध्यम से कंपोजिट विद्यालय तक भेजा जाता है. स्कूल में इसका इस्तेमाल मिड-डे मील बनाने में हो रहा है. प्रधानाचार्य ने बताया कि गैस की नियमित आपूर्ति मिलने से खाना तैयार करने में काफी सुविधा हो रही है. बच्चों को नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की जानकारी भी मिल रही है.

गोबर से गैस बनने लगी स्कूल में
पिपरा चंद्रभान की इस व्यवस्था की खास बात सिर्फ इतनी नहीं है कि गोबर से गैस तैयार हो रही है. प्लांट से निकलने वाली स्लरी को सुखाकर जैविक खाद भी बनाई जा रही है. यह खाद किसानों को पांच से आठ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराई जा रही है. यानी एक ही प्रक्रिया से निकलने वाली चीज का दूसरा इस्तेमाल भी हो रहा है. गोबर से बायोगैस तैयार होने के बाद बची स्लरी खेतों के काम आ रही है. इसी खाद की बिक्री से ग्राम पंचायत को अतिरिक्त आय मिल रही है. यही पहलू इस परियोजना को गांव के स्तर पर अलग पहचान देता है.

स्कूल से पंचायत तक पहुंचा फायदा
अब जरा कमाई का पूरा हिसाब समझिए. विद्यालय में गैस के इस्तेमाल के बदले रोजाना 80 रुपये का भुगतान किया जाता है. अब तक गैस की बिक्री से करीब 11,740 रुपये की आय हुई है. वहीं जैविक खाद की बिक्री से करीब 14,301 रुपये मिले हैं. परियोजना से ग्राम पंचायत को अलग-अलग मदों में अब तक कुल करीब 46,241 रुपये की आय प्राप्त हुई है. इस तरह प्लांट का फायदा सिर्फ स्कूल की रसोई तक सीमित नहीं है. गैस के इस्तेमाल से स्कूल को सुविधा मिल रही है, खाद किसानों के काम आ रही है और पंचायत को भी आय मिल रही है.

286 गोवंश से शुरू हुई पूरी प्रक्रिया
इस पूरी व्यवस्था की शुरुआत ग्राम पंचायत की गौशाला से होती है, जहां करीब 286 गोवंश से मिलने वाला गोबर एकत्र किया जाता है. इसके बाद इसे बायोगैस संयंत्र में पहुंचाया जाता है. 85 घन मीटर क्षमता वाले इस प्लांट में गोबर से गैस तैयार होती है. फिर यही गैस पाइपलाइन के जरिए विद्यालय तक जाती है. इस प्रक्रिया में गोबर का इस्तेमाल ऊर्जा तैयार करने के लिए किया जा रहा है. दूसरी तरफ प्लांट से निकलने वाली स्लरी को जैविक खाद में बदला जाता है. इस तरह गौशाला से निकलने वाली सामग्री का इस्तेमाल एक से ज्यादा काम में हो रहा है.

बच्चों के भोजन तक स्वच्छ ऊर्जा
कंपोजिट विद्यालय में करीब 170 बच्चे पढ़ते हैं और उनके लिए तैयार होने वाला मिड-डे मील इसी बायोगैस से बनाया जा रहा है. स्कूल के प्रधानाचार्य के मुताबिक, प्लांट से नियमित गैस मिल रही है, जिससे भोजन तैयार करने में काफी सुविधा हो रही है. इसके साथ ही बच्चों को नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के महत्व की जानकारी भी मिल रही है. यानी यहां बायोगैस का इस्तेमाल केवल खाना बनाने तक नहीं है. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के सामने इसी व्यवस्था के जरिए स्वच्छ ऊर्जा का एक व्यावहारिक उदाहरण भी मौजूद है.

अब पंचायत की कमाई भी बढ़ी
प्लांट के संचालन और देखरेख के लिए स्थानीय स्तर पर ऑपरेटर की तैनाती की गई है. गौशाला में काम करने वाले कर्मचारी भी गोबर संग्रह, साफ-सफाई और दूसरी जरूरी गतिविधियों में सहयोग करते हैं. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बने हैं. दूसरी तरफ जैविक खाद की बिक्री से पंचायत को आय मिल रही है और स्कूल को गैस की आपूर्ति हो रही है. अब तक गैस, खाद और अलग-अलग मदों से पंचायत को करीब 46,241 रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है. इस तरह पिपरा चंद्रभान में गोबर से गैस, खाद, स्कूल की सुविधा और पंचायत की आय, चारों पहलू एक ही व्यवस्था से जुड़े हैं.

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TV 21 Network Desk

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