आईपीएल के आगामी सीजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ऑक्शन को देश से बाहर ले जाने के बजाय वापस भारत में ही आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के पीछे फ्रेंचाइजियों की प्रतिक्रिया और उनकी परेशानियों को मुख्य आधार बनाया गया है।
क्यों बदला गया ऑक्शन का वेन्यू?
मीडिया रिपोर्ट्स और सामने आई जानकारियों के मुताबिक, ऑक्शन को दोबारा भारत लाने के फैसले में सभी आईपीएल फ्रेंचाइजियों का फीडबैक बेहद अहम रहा है। दरअसल, टीमों ने मिनी ऑक्शन के लिए अपने पूरे डेलिगेशन और सपोर्ट स्टाफ को विदेश ले जाने में होने वाली लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल परेशानियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इससे पहले पिछले साल अबू धाबी में हुए ऑक्शन के दौरान भी फ्रेंचाइजियों की यह चिंता खुलकर सामने आई थी। इन सभी व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए गवर्निंग काउंसिल ने इस बार भारत में ही उपयुक्त वेन्यू तलाशने का फैसला किया है।
मिनी-ऑक्शन का फॉर्मेट और समीकरण
मिनी-ऑक्शन के नियमों के तहत टीमें पूरी तरह से अपनी पुरानी स्क्वॉड को नहीं बदलती हैं। फ्रेंचाइजियां अपने मौजूदा खिलाड़ियों के बड़े और मजबूत हिस्से को रिटेन करते हुए केवल खाली स्लॉट और टीम की रणनीतिक जरूरतों के अनुसार नए खिलाड़ियों पर दांव लगाती हैं। 2026 के इस ऑक्शन से पहले सभी 10 टीमों ने मिलकर कुल 173 खिलाड़ियों को अपने साथ बनाए रखा था, जिसके बाद कुल 77 स्लॉट खाली बचे थे। इन सभी टीमों के पास खिलाड़ियों की खरीद के लिए कुल ₹237.55 करोड़ का पर्स उपलब्ध था।
इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर अगले महीने होगा फैसला
ऑक्शन के साथ-साथ ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। गवर्निंग काउंसिल ने फिलहाल इस नियम पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। बीसीसीआई ने सभी 10 फ्रेंचाइजियों से इस नियम को लेकर लिखित फीडबैक मांगा था, जिसमें ज्यादातर टीमों का रुख इसके खिलाफ नजर आ रहा है। कुछ टीमों का तर्क है कि उन्होंने इसी नियम को ध्यान में रखकर अपनी मौजूदा रणनीति और स्क्वॉड तैयार की है, इसलिए इसे हटाने का फैसला फिलहाल टाला जा सकता है। अब से लगभग एक महीने बाद आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की अगली बैठक होगी, जिसमें इस नियम को जारी रखने, इसमें बदलाव करने या इसे पूरी तरह समाप्त करने पर अंतिम मुहर लगेगी।







