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On: September 13, 2026 12:54 PM

दुनिया का सबसे ताकतवर नेता कौन? मोदी, जिनपिंग या पुतिन…BRICS में किसका सबसे बड़ा दबदबा?

World's Most Richest Leader: दिल्ली BRICS के महासम्मेलन के बड़े-बड़े नेताओं में सबसे ताकतवर कौन हैं, मोदी, जिनपिंग या पुतिन? जब इन नेताओं की पूरी कहानी जानेंगे, तब समझ आएगा कि ब्रिक्स सम्मेलन में सबसे ताकतवर नेता कौन हैं?

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BRICS Most Powerful Leader: देश की राजधानी दिल्ली में दुनिया के बड़े-बड़े नेताओं का जमघट लगा हुआ है. इसी बीच हर किसी के मन में सवाल उठ रहा होगा, कि आखिर BRICS की इस महाबैठक में सबसे ताकतवर नेता कौन है? गांव-देहात की भाषा में कहें तो ‘जिसकी बात पर सबसे ज्यादा देश कान धरें, वही असली खिलाड़ी है.’ 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और ईरान के मसूद पेजेशकियन जैसे नेता शामिल हुए. BRICS अब पहले वाला छोटा क्लब नहीं रहा है, इसका विस्तार हो चुका है और यह दुनिया की करीब आधी आबादी से जुड़े देशों का बड़ा मंच बन चुका है.

अगर ताकत को अर्थव्यवस्था, सैन्य क्षमता, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय असर से तौला जाए तो शी जिनपिंग सबसे मजबूत दावेदार दिखाई देते हैं. चीन BRICS की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है और जिनपिंग चीन की पार्टी, सरकार और सेना तीनों के शीर्ष पर हैं. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. नरेंद्र मोदी भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक पकड़ के कारण बेहद प्रभावशाली हैं, जबकि पुतिन रूस की सैन्य और ऊर्जा ताकत के दम पर अलग तरह का दबदबा रखते हैं. इसलिए सबसे ताकतवर नेता का कोई खिताब नहीं है, बल्कि यह तुलना अलग-अलग पैमानों पर की जा सकती है.

पीएम मोदी का जन्मदिन कब है?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कहानी गांव के एक छोटे घर से शुरू हुई. 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे मोदी का बचपन साधारण आर्थिक हालात में बीता. प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, उनका परिवार करीब 40 फीट लंबाई और 12 फीट चौड़ाई वाले छोटे से घर में रहता था. बचपन में वह परिवार की चाय की दुकान पर हाथ बंटाते थे और पढ़ने के साथ बहस तथा किताबों में उनकी खास दिलचस्पी थी. आगे चलकर उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया और RSS के रास्ते संगठन की राजनीति में आए. फिर BJP में सक्रिय होते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री और 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने.

पीएम मोदी की कितनी है संपत्ति
मोदी की ताकत सिर्फ कुर्सी से नहीं आती, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से भी जुड़ी है. 2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में मोदी ने चीन, रूस और ईरान समेत कई नेताओं से अहम बातचीत की. निजी संपत्ति की बात करें तो यहां सोशल मीडिया के आंकड़ों से बचना जरूरी है. सरकारी संपत्ति घोषणाओं में मोदी की संपत्ति करीब ₹3.43 करोड़ बताई गई है. इसमें बड़ी हिस्सेदारी बैंक जमा और बचत साधनों की है. यानी दुनिया के बड़े नेताओं की तुलना में मोदी की घोषित निजी संपत्ति बहुत बड़ी नहीं दिखती है. उनकी असली ताकत राजनीतिक प्रभाव और भारत की स्थिति है.

शी जिनपिंग का जन्म कहां हुआ
अब आइए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर. उनका बचपन भी आसान नहीं रहा. जून 1953 में शान्शी प्रांत में जन्मे जिनपिंग के पिता चीन की कम्युनिस्ट व्यवस्था में बड़े पद पर रहे थे, लेकिन राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में परिवार को मुश्किलों का सामना करना पड़ा. किशोर उम्र में जिनपिंग को गांव भेज दिया गया, जहां उन्होंने करीब सात साल किसानों के साथ रहते हुए खेतों में काम किया. उन्होंने बाद में सिंघुआ विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और कानून में डॉक्टरेट हासिल की. 1974 में कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए और धीरे-धीरे स्थानीय संगठन से ऊपर उठते हुए चीन की सर्वोच्च सत्ता तक पहुंचे.

कितने ताकतवर हैं शी जिनपिंग
शी जिनपिंग की सबसे बड़ी ताकत उनकी एक साथ पार्टी, सरकार और सेना पर पकड़ है. वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव, राष्ट्रपति और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष हैं. यानी चीन की सत्ता का बड़ा हिस्सा एक ही हाथ में केंद्रित है. उनकी निजी संपत्ति को लेकर इंटरनेट पर अरबों डॉलर के दावे मिलते हैं, लेकिन विश्वसनीय सार्वजनिक रिकॉर्ड से उनकी वास्तविक व्यक्तिगत नेटवर्थ तय करना मुश्किल है. इसलिए यह कहना कि जिनपिंग की निजी संपत्ति निश्चित रूप से इतने अरब डॉलर है, सही पत्रकारिता नहीं होगी. उनकी असली ताकत निजी बैंक बैलेंस से ज्यादा चीन की विशाल अर्थव्यवस्था, उद्योग, व्यापार, निवेश और सैन्य क्षमता से आती है.

पुतिन ने कहां तक की है पढ़ाई
व्लादिमीर पुतिन की कहानी भी कम फिल्मी नहीं है. 7 अक्टूबर 1952 को लेनिनग्राद, आज के सेंट पीटर्सबर्ग, में जन्मे पुतिन ने कानून की पढ़ाई की और 1975 में लेनिनग्राद स्टेट यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली. इसके बाद वह सोवियत खुफिया एजेंसी KGB में गए और 1985 से 1990 तक पूर्वी जर्मनी में काम किया. सोवियत संघ टूटने के बाद उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग की राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे मॉस्को की सत्ता के केंद्र तक पहुंचे. 1999 में प्रधानमंत्री और फिर राष्ट्रपति बने. तब से रूस की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बना हुआ है.

रूसी पुतिन की कितनी है संपत्ति
पुतिन की दौलत पर सबसे ज्यादा रहस्य है. आधिकारिक घोषणाओं में उनकी निजी संपत्ति और आय सीमित दिखाई जाती है, लेकिन कुछ जांचों और अनुमानों में उनकी छिपी संपत्ति दहाई से लेकर करीब 200 अरब डॉलर तक होने के दावे किए गए हैं. मगर यह आंकड़ा प्रमाणित निजी नेटवर्थ नहीं है. इसलिए इसे तथ्य की तरह लिखना गलत होगा. असली बात यह है कि रूस परमाणु हथियार, ऊर्जा, तेल-गैस और बड़ी सैन्य क्षमता वाला देश है और पुतिन लंबे समय से उसकी सत्ता के केंद्र में हैं. BRICS में उनकी ताकत सैन्य और भू-राजनीतिक असर से आती है, जबकि मोदी की ताकत कूटनीति और चीन की ताकत अर्थव्यवस्था से.

कितने अमीर हैं ब्राजील के लूला
ब्राजील के लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा यानी लूला की कहानी इन सबसे बिल्कुल अलग है. 27 अक्टूबर 1945 को ब्राजील के गरीब पूर्वोत्तर इलाके में जन्मे लूला का परिवार बचपन में बेहतर जिंदगी की तलाश में साओ पाउलो चला गया. सरकारी जीवनी के मुताबिक, उन्होंने कम उम्र में काम शुरू किया, 12 साल की उम्र में नौकरी की और बाद में SENAI से मैकेनिकल टर्नर की ट्रेनिंग ली. फैक्ट्री में काम करते-करते वह मजदूर यूनियन से जुड़े और 1970 के दशक में बड़े ट्रेड यूनियन नेता बने. यहीं से उनकी राजनीति शुरू हुई और लंबे संघर्ष के बाद वह ब्राजील के राष्ट्रपति बने. 2026 में उन्होंने BRICS शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लिया और ब्राजील का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री ने किया.

ब्राजील के लूला की जानिए कहानी
लूला की संपत्ति को लेकर भी एक दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है. 2026 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने करीब 4.77 मिलियन ब्राजीलियन रियाल, यानी लगभग ₹4-5 करोड़ के आसपास का घोषित patrimonio बताया. 2022 में यही आंकड़ा करीब 7.42 मिलियन रियाल था. उनके घोषित assets में निजी पेंशन, निवेश, जमीन और मकान जैसी चीजें शामिल हैं. अब बात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की करें तो उनकी कहानी भी अलग है. 1954 में महाबाद में जन्मे पेजेशकियन डॉक्टर बने, हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में काम किया और ईरान-इराक युद्ध के दौरान सैनिकों और घायलों का इलाज किया. बाद में राजनीति में आए और 2024 में ईरान के राष्ट्रपति बने.

सऊदी अरब के MBS की कहानी
और आखिर में सऊदी अरब के मोहम्मद बिन सलमान, जिन्हें दुनिया MBS के नाम से जानती है. यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. सऊदी अरब की BRICS स्थिति को लेकर 2026 में भी सदस्यता और भागीदारी के अलग-अलग संदर्भ सामने आए हैं. इसलिए उन्हें चीन, भारत, रूस, ब्राजील और ईरान की तरह निर्विवाद पूर्ण सदस्य बताना ठीक नहीं होगा. MBS का जन्म 31 अगस्त 1985 को रियाद में हुआ. उन्होंने रियाद में पढ़ाई की और किंग सऊद यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली, अपनी कक्षा में दूसरे स्थान पर रहे. वह कम उम्र में सत्ता के महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे और आज सऊदी शासन के सबसे प्रभावशाली चेहरों में हैं.

कौन है सबसे ताकतवर नेता?
तो फिर आखिरी फैसला क्या है? अगर आर्थिक ताकत और सत्ता के केंद्रीकरण को जोड़ें तो शी जिनपिंग सबसे मजबूत दावेदार हैं. सैन्य और भू-राजनीतिक ताकत में पुतिन बेहद आगे हैं. वहीं कूटनीति, लोकतांत्रिक जनादेश और भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत के कारण नरेंद्र मोदी का प्रभाव तेजी से बढ़ा है. और यही BRICS की असली तस्वीर है. यहां एक राजा नहीं, कई बड़े खिलाड़ी हैं. दिल्ली सम्मेलन ने भी यही दिखाया कि मोदी, जिनपिंग और पुतिन के बीच रिश्ते जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही अहम भारत-चीन मतभेद, रूस के पश्चिम से तनाव और ईरान का संकट भी है. इसलिए सबसे ताकतवर का जवाब पैमाना बदलते ही बदल जाता है.

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