आयुष क्षेत्र का आर्थिक विस्तार
भारत का आयुष सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ते सेवा क्षेत्रों में अपनी जगह बना रहा है। विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (RIS) के अध्ययन के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में आयुष सेवा अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। अध्ययन में वित्त वर्ष 2022-23 से इस क्षेत्र की 16.91 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार आयुष अब केवल स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, कल्याण सेवाओं, स्वास्थ्य पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ता जा रहा है। इस अध्ययन को 23 सितंबर को नागपुर में आयोजित 11वें आयुर्वेद दिवस समारोह के दौरान जारी किया गया था।
17 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका
आरआईएस के राष्ट्रीय स्तर पर किए गए अध्ययन में आयुष क्षेत्र से जुड़े 15,914 संस्थानों का सर्वेक्षण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक आयुष सेवा क्षेत्र प्रत्यक्ष रूप से करीब 17.6 लाख लोगों की आजीविका को समर्थन देता है।
इनमें बड़ी संख्या स्थानीय और स्वतंत्र क्लीनिकों में काम करने वाले लोगों की है। अध्ययन में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय बताई गई है। आयुष सेवा क्षेत्र के कुल कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत है। कुछ संगठित क्षेत्रों में यह भागीदारी 50 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज की गई।
क्लीनिक और डे-केयर सेंटर की बड़ी हिस्सेदारी
अध्ययन के मुताबिक क्लीनिक और डे-केयर सेंटर आयुष सेवा अर्थव्यवस्था के प्रमुख हिस्से हैं। दोनों मिलकर क्षेत्र के कुल राजस्व में 71 प्रतिशत से अधिक योगदान करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार क्लीनिकों से अनुमानित 16.21 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व और डे-केयर सेंटरों से करीब 10.13 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ। आयुष की विभिन्न प्रणालियों में आयुर्वेद सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाली प्रणाली रही, जिसका अनुमानित आर्थिक योगदान 17.73 अरब डॉलर बताया गया है।
योग और वेलनेस सेवाओं में भी बढ़ोतरी
आयुष आधारित स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेवाओं का दायरा भी बढ़ रहा है। इनमें योग केंद्र, स्पा और आयुष सेवाएं देने वाले रिसॉर्ट शामिल हैं। अध्ययन के अनुसार इस हिस्से में 21.29 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि दो वर्षों के दौरान योग केंद्रों के राजस्व में करीब 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह आंकड़ा निवारक स्वास्थ्य, योग, वेलनेस और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं की मांग में बढ़ोतरी की ओर संकेत करता है।
मेडिकल वैल्यू ट्रैवल में आयुष की भूमिका
अध्ययन में मेडिकल वैल्यू ट्रैवल यानी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे देशों से भारत आने वाले मरीजों के संदर्भ में भी आयुष की संभावनाओं का उल्लेख किया गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 में आयुष क्षेत्र से मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के तहत करीब 1.77 अरब अमेरिकी डॉलर के राजस्व का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मरीजों की संख्या कुल मरीजों का लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन अस्पताल के राजस्व में उनका योगदान करीब 15 से 25 प्रतिशत तक हो सकता है।
पंचकर्म और आवासीय योग जैसे आयुष आधारित कार्यक्रमों के कारण कुछ मरीजों का ठहराव भी लंबा रहता है। अध्ययन में अस्पतालों में मरीजों के औसत प्रवास की अवधि 5 से 11 दिन के बीच बताई गई है।
डिजिटल मौजूदगी और गुणवत्ता मान्यता का असर
अंतरराष्ट्रीय मरीजों को आकर्षित करने में डिजिटल सुविधाओं और गुणवत्ता मान्यता को भी महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। अध्ययन के अनुसार जिन आयुष प्रतिष्ठानों की अपनी कार्यात्मक वेबसाइट है, उनके अंतरराष्ट्रीय मरीजों को आकर्षित करने की संभावना बिना वेबसाइट वाले प्रतिष्ठानों की तुलना में 3.6 गुना अधिक पाई गई।
इसी तरह NABH या ISO जैसी गुणवत्ता मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए अंतरराष्ट्रीय मरीजों को आकर्षित करने की संभावना लगभग दोगुनी बताई गई है। इससे आयुष क्षेत्र में डिजिटल उपस्थिति, गुणवत्ता व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सेवाओं की जरूरत सामने आती है।
2047 तक 318 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
आरआईएस के अध्ययन में आयुष सेवा क्षेत्र के भविष्य को लेकर भी अनुमान प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार यदि बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता प्रणाली, कौशल विकास, डिजिटल क्षमता और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को मजबूत किया जाता है, तो आयुष सेवा अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2024-25 के 36.92 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2047 तक 216 से 318 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच पहुंच सकती है।
अध्ययन में आयुष की भविष्य की वृद्धि के लिए ज्ञान मूल्य श्रृंखला, उद्यम एवं संस्थागत क्षमता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और मेडिकल वैल्यू ट्रैवल जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। साथ ही डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
आयुष को लेकर सरकार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने अध्ययन के निष्कर्षों को आयुष क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के अनुसार पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर सर्वेक्षण के जरिए आयुष सेवा क्षेत्र के आर्थिक योगदान का आकलन किया गया है। आरआईएस के महानिदेशक प्रोफेसर सचिन कुमार शर्मा ने भी अध्ययन को आयुष सेवा अर्थव्यवस्था की साक्ष्य-आधारित समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कुल मिलाकर अध्ययन आयुष क्षेत्र को स्वास्थ्य और कल्याण के साथ-साथ रोजगार, सेवा आधारित आर्थिक गतिविधियों, उद्यमिता और मेडिकल वैल्यू ट्रैवल से जुड़े एक बड़े क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करता है। हालांकि 2047 के आंकड़े अध्ययन में दिए गए अनुमान हैं, वास्तविक वृद्धि बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता, कौशल, डिजिटल क्षमता और वैश्विक बाजार तक पहुंच जैसे कारकों पर निर्भर करेगी।








