भदोही में रविवार का दिन बाकी दिनों से कुछ अलग रहा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां पहुंचे तो मंच से एक के बाद एक कई बड़ी बातें सामने आईं. भदोही, औराई और ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्रों के लिए 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ. सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, चाभी और नियुक्ति पत्र भी दिए गए. लेकिन कार्यक्रम आगे बढ़ा तो बात सिर्फ विकास योजनाओं तक नहीं रुकी. धीरे-धीरे जिले की पहचान और युवाओं के भविष्य की चर्चा भी सामने आ गई.
कहानी का अगला पन्ना तब खुला, जब मुख्यमंत्री ने भदोही के नाम को लेकर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि अब जिला ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा. सीएम ने इसे संत रविदास की विरासत और समाज को जोड़ने वाले उनके संदेश से जोड़ते हुए अपनी बात रखी. कालीन के हुनर से दुनिया में पहचान बनाने वाले इस जिले के लिए यह घोषणा कार्यक्रम की बड़ी बात बन गई. यानी एक तरफ विकास की परियोजनाएं थीं, तो दूसरी तरफ जिले की पहचान को लेकर नया ऐलान था.
युवाओं की नौकरी पर आया जोर
नाम और विकास की बात के बाद मुख्यमंत्री की नजर सीधे युवाओं पर गई. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दे चुकी है. इसके साथ ही अगले छह महीने में एक लाख और नौजवानों को सरकारी नौकरी देने की बात कही. भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों को लेकर भी उन्होंने कड़ा संदेश दिया. उनका कहना था कि युवाओं की नौकरी में सेंध लगाने वाले जेल जाएंगे और संपत्ति जब्त होगी. नौकरी और भर्ती को लेकर मुख्यमंत्री पहले भी छह महीने में एक लाख नियुक्तियों की बात कह चुके हैं.
सपा सरकार पर सीधा हमला
युवाओं की बात निकली तो मुख्यमंत्री का निशाना समाजवादी पार्टी पर भी गया. उन्होंने कहा कि सपा सरकार में युवा, कारीगर, किसान और महिलाएं एजेंडे का हिस्सा नहीं थे, बल्कि परिवार, तुष्टीकरण और अराजकता हावी थी. उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में दंगाइयों और उपद्रवियों का महिमामंडन होता था. इसी सिलसिले में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश अब माफिया, कर्फ्यू और उपद्रव से मुक्त हो चुका है और सरकार इसे उत्सव प्रदेश बना रही है.
तीर्थों के विकास पर उठी बात
इसके बाद मुख्यमंत्री ने धार्मिक स्थलों और विरासत के संरक्षण का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि आज तीर्थों के विकास, पूर्वजों की धरोहर के संरक्षण और सुंदरीकरण पर पैसा खर्च हो पा रहा है. उनके मुताबिक 2017 से पहले यह पैसा इन तीर्थों को नहीं मिलता था. उन्होंने आरोप लगाया कि यही पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल के नाम पर जमीनों पर कब्जे के माध्यम के रूप में इस्तेमाल होता था. यह बात उन्होंने अपने राजनीतिक आरोप के तौर पर रखी. कार्यक्रम में विकास और विरासत की चर्चा के बीच यह हिस्सा भी खासा अहम रहा.
भदोही की पहचान अब बदलेगी
फिर बात वापस उसी जिले पर आई, जहां से पूरी कहानी शुरू हुई थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही अब ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा. उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी में भी उन्होंने भदोही को संत रविदास के नाम से पहचान देने की बात कही थी. उनका कहना था कि संत रविदास समाज को जोड़ने का संदेश देने वाले संत रहे हैं. कालीन उद्योग के लिए मशहूर भदोही की पहचान अब उनके नाम और विरासत से भी जुड़ने की बात कही गई.
कालीन से दुनिया तक पहुंची पहचान
भदोही की कहानी में कालीन का हुनर भी पीछे नहीं रहा. मुख्यमंत्री ने प्रदेश के निर्यात की तस्वीर रखते हुए कहा कि पिछले 10 साल में उत्तर प्रदेश का निर्यात करीब 2.27 गुना बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है और प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य है. इसमें भदोही के कालीन उद्योग का बड़ा योगदान बताया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार में भदोही का हुनर विकास और वैश्विक बाजार से जुड़ रहा है. यानी जिस जिले की पहचान कालीन से बनी, उसी पहचान को बाजार और अवसर से जोड़ने की बात भी सामने आई.
आखिर में खुली पूरी तस्वीर
अब पूरी कहानी को एक साथ देखें तो रविवार का कार्यक्रम सिर्फ 112 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास तक सीमित नहीं रहा. एक ही मंच से भदोही के लिए 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई, जिले का नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने का ऐलान हुआ और युवाओं के लिए अगले छह महीने में एक लाख सरकारी नौकरियों का वादा सामने आया. इसके साथ मुख्यमंत्री ने सपा सरकार की नीतियों पर हमला बोला और तीर्थों व विरासत के विकास को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया.
Source: TV21 Network





