सफर हुआ महंगा, जेब पर पड़ा अतिरिक्त बोझ
आजकल अगर आप अपनी दोपहिया गाड़ी लेकर सड़कों पर निकल रहे हैं तो ईंधन का बढ़ता खर्च आपकी चिंता बढ़ा सकता है एक बाइक सवार ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह अपनी होंडा मोटरसाइकिल से पहले महज 200 रुपये के पेट्रोल में 61 किलोमीटर तक का सफर आसानी से तय कर लेता था लेकिन हाल ही में जब उसने उसी पुरानी दूरी को दोबारा तय किया तो उसकी जेब से 350 रुपये खर्च हो गए गाड़ी वही है और चलाने का तरीका भी पुराना है फिर भी ईंधन का खर्च अचानक इतना बढ़ जाना हर आम वाहन चालक के लिए एक बड़ा झटका साबित हो रहा है
इथेनॉल का गणित और घटता माइलेज
ईंधन खर्च में अचानक आए इस भारी उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है सरकार की नीति के तहत पेट्रोल में इथेनॉल का प्रतिशत बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक कर दिया गया है जानकारों का कहना है कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य शुद्ध पेट्रोल की तुलना में कम होती है इस कारण जब इंजन में यह ईंधन जलता है तो गाड़ी को समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की खपत करनी पड़ती है यही वजह है कि वही होंडा बाइक अब पहले के मुकाबले काफी कम माइलेज दे रही है
इंजन पर असर और चालकों की परेशानी
भारतीय सड़कों पर दौड़ रही ज्यादातर पुरानी बाइक और गाड़ियां E10 यानी 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के हिसाब से डिजाइन की गई थीं अब जब पेट्रोल पंपों पर अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सप्लाई किया जा रहा है तो इन गाड़ियों के इंजन इसे सही तरीके से पचा नहीं पा रहे हैं इससे न केवल माइलेज में बड़ी गिरावट आ रही है बल्कि इंजन की परफॉर्मेंस और पिकअप पर भी बुरा असर पड़ रहा है कई मैकेनिकों का मानना है कि लंबे समय तक इस ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों के स्पार्क प्लग और फ्यूल पाइप में भी खराबी आ सकती है
आम जनता के बजट पर सीधा हमला
माइलेज में आई इस गिरावट ने रोजाना दफ्तर जाने वाले और दूर-दराज का सफर तय करने वाले लोगों का मासिक बजट बिगाड़ दिया है जो व्यक्ति महीने में पेट्रोल पर दो से तीन हजार रुपये खर्च करता था उसका खर्च अब बढ़कर करीब डेढ़ गुना हो चुका है लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि पेट्रोल के दाम स्थिर होने के बावजूद उनकी टंकी इतनी जल्दी खाली क्यों हो रही है सोशल मीडिया पर भी कई बाइक सवार अपने गाड़ियों की घटती माइलेज को लेकर लगातार अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं और इसके पीछे सीधे तौर पर इथेनॉल को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं
आगे का रास्ता और सरकार से उम्मीदें
वाहन चालकों का कहना है कि सरकार को इथेनॉल मिश्रण की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए या फिर पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल का विकल्प भी उपलब्ध कराना चाहिए हालांकि पर्यावरण और विदेशी मुद्रा बचत के लिहाज से इथेनॉल का इस्तेमाल फायदेमंद माना जाता है लेकिन जब तक सड़कों पर दौड़ रही करोड़ों पुरानी गाड़ियाँ इसके अनुकूल नहीं बनतीं तब तक आम जनता को इस नुकसान से बचाना जरूरी है आने वाले समय में अगर ऑटोमोबाइल कंपनियां और सरकार इसका कोई ठोस तकनीकी समाधान नहीं निकालती हैं तो आम आदमी की दोपहिया सवारी और ज्यादा महंगी होती जाएगी










