UPSC के 100 साल पूरे, प्रधानमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में बदलाव पर दिया जोर
नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भर्ती प्रक्रिया को बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाने और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। 1 अक्टूबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास यात्रा के लिए सिविल सेवाओं और चयन आयोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संबोधन के अनुसार, कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, UPSC के सदस्य और विभिन्न राज्यों के लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष मौजूद रहे।
100 वर्षों की यात्रा पर विशेष कार्यक्रम
प्रधानमंत्री ने UPSC के 100 वर्षों के सफर को देश की संस्थागत विरासत और युवाओं के भरोसे से जुड़ा बताया। इस अवसर पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किए जाने के साथ 100 महत्वपूर्ण केस लॉ का संकलन भी प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भर्ती प्रक्रिया में भविष्य की जरूरतों पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकारी सेवाओं में चयन करते समय दो कसौटियों—‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘नागरिक प्रथम’—को ध्यान में रखना चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक सेवाओं में आने वाले युवाओं में देश के प्रति जिम्मेदारी और नागरिकों की समस्याओं को समझने की भावना होनी चाहिए।
उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में इस बात को भी महत्व देने की आवश्यकता बताई कि उम्मीदवार सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारियों को अपने सेवा जीवन की शुरुआत में यह लिखकर रखना चाहिए कि वे सिविल सेवा में क्यों आए हैं, ताकि जिम्मेदारियां बढ़ने पर उन्हें अपने उद्देश्य की याद बनी रहे।
AI और नई तकनीकी चुनौतियों का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक, एल्गोरिदम में संभावित पक्षपात और जलवायु न्याय जैसे विषयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में सिविल सेवकों को जटिल समस्याओं का समाधान निकालने और दूरदृष्टि के साथ काम करने की क्षमता की जरूरत होगी।
उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में केवल ज्ञान की जांच करने के बजाय उम्मीदवारों की समस्या सुलझाने की क्षमता और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनकी प्रेरणा को भी महत्व देने की बात कही।
परीक्षा प्रक्रिया में देरी कम करने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी का असर युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ता है। कोचिंग फीस, किराया और परिवहन जैसे खर्च उम्मीदवारों पर आर्थिक बोझ डाल सकते हैं।
उन्होंने UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों से परीक्षा चक्र को छोटा करने और समय की निश्चितता सुनिश्चित करने पर काम करने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा की गुणवत्ता के मानकों को कम किए बिना प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है।
चयन आयोगों के बीच बेहतर तालमेल की बात
प्रधानमंत्री ने UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों के बीच अनुभव तथा बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं का अध्ययन करने और तकनीक की मदद से कार्यक्षमता बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई।
उन्होंने चयन आयोगों की क्षमता बढ़ाने के लिए मिशन कर्मयोगी के i-GOT प्लेटफॉर्म जैसे माध्यमों के उपयोग का सुझाव दिया।
महिलाओं और छोटे शहरों के युवाओं की भागीदारी का उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि समय के साथ सिविल सेवाओं में अवसरों का दायरा बढ़ा है। उन्होंने संबोधन में दिए गए आंकड़ों के आधार पर बताया कि 1952 में सिविल सेवाओं में महिला उम्मीदवारों की भागीदारी लगभग 3 प्रतिशत थी, जबकि अब यह 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों से आने वाले युवाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।
UPSC की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि UPSC की स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता आधारित चयन, गोपनीयता और पारदर्शी प्रक्रिया उसकी पहचान हैं। उन्होंने इन मूल्यों को बनाए रखते हुए भविष्य की चुनौतियों के अनुसार संस्थागत व्यवस्था को विकसित करने की आवश्यकता बताई।
UPSC के शताब्दी समारोह में दिए गए संबोधन का मुख्य जोर भर्ती प्रक्रिया में सुधार, परीक्षा में समयबद्धता, तकनीक के उपयोग और नागरिकों के प्रति जिम्मेदार प्रशासन पर रहा।
स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), PIB दिल्ली
प्रविष्टि तिथि: 1 अक्टूबर 2026











