राजनीति में एंटी इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर कोई नई बात नहीं है. राहुल गांधी ने इसी सवाल को मौजूदा Election Commission और SIR विवाद से जोड़ दिया है. 24 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पूछा कि राज्यों में सरकारों के खिलाफ यह असर दिखता है, लेकिन नरेंद्र मोदी और BJP के मामले में एंटी इनकंबेंसी क्यों नहीं दिख रही. यही बड़ा सवाल अब चुनावी बहस का सबसे ज्यादा चर्चा वाला सवाल बन गया है और चुनावी बहस के बीच राजनीतिक मुद्दा बन गया.
इस सवाल को हवा The Indian Express की 23 सितंबर की रिपोर्ट के बाद मिली. रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो Election Commissioners, Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi, ने पिछले 10 महीनों में आयोग पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की. रिपोर्ट के मुताबिक ये आपत्तियां SIR, नए मतदाताओं, नाम हटाने और वोटर डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं. राहुल गांधी ने इसी रिपोर्ट के आधार पर पूरी चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाए और Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग की. हालांकि Election Commission ने SIR से जुड़े सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया बताया.
एंटी इनकंबेंसी पर राहुल का सवाल
विवाद का सवाल यहीं से उठता है कि चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा कैसे कायम रहे. राहुल गांधी ने एंटी इनकंबेंसी को भारत की राजनीति की बुनियादी ताकत बताते हुए इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया और कहा कि उपलब्धियों के बावजूद सत्ता विरोधी भावना सामने आई थी. उनका तर्क है कि राज्यों में सत्ता बदलती रही है, फिर BJP और मोदी सरकार के मामले में यह असर क्यों नहीं दिखता. दूसरी तरफ BJP ने इन दावों को खारिज किया है. पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने Election Commission की प्रक्रिया को कानूनी बताया और कहा कि फैसले बहुमत की सहमति से होते हैं.
SIR विवाद से जुड़ा बड़ा सवाल
SIR यानी Special Intensive Revision इस बहस का अहम हिस्सा ही है. The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट वोटर रोल से हटाए गए. आयोग के भीतर आपत्तियां सामने आने का दावा किया गया. दूसरी ओर, Election Commission का पक्ष है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए. ऐसे में वोटर लिस्ट, नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस से जुड़े सवालों पर आगे मिलने वाले स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होंगे. यही वजह है कि Election Commission SIR विवाद राजनीतिक बहस में लगातार बना हुआ जारी है.
मोदी सरकार पर असर का सवाल
अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या इस विवाद से मोदी सरकार पर कोई सीधा राजनीतिक असर पड़ेगा. फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा. राहुल गांधी के आरोप और एंटी इनकंबेंसी का सवाल विपक्ष की राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं, जबकि BJP और Election Commission इन्हें स्वीकार नहीं करते. इसलिए आगे की तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि SIR, वोटर लिस्ट और आयोग की आंतरिक आपत्तियों पर क्या तथ्य और स्पष्टीकरण सामने आते हैं. आम मतदाता के लिए फिलहाल मुद्दा यही है कि चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा और पूरी पारदर्शिता कैसे बनी रहे.
(TV21 Network Source: The Indian Express की रिपोर्ट, Election Commission का पक्ष और 24-25 सितंबर 2026 को सामने आए राजनीतिक बयानों के आधार पर तैयार. रिपोर्ट में किए गए दावों और संबंधित पक्षों के रुख को अलग-अलग रखा गया है.)





