जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। मंगलवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जम्मू-कश्मीर इकाई और राष्ट्रीय हिंदू कल्याण संगठन ने संयुक्त रूप से महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा स्थल पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस मौके पर ‘जम्मू धर्मयुद्ध अभियान’ का आधिकारिक रूप से शुभारंभ किया गया, जिसके तहत जम्मू क्षेत्र के मूल निवासियों के अधिकारों और सुरक्षा की मांग को जोर-शोर से उठाया गया है।
केंद्र सरकार और भाजपा पर साधा निशाना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिवसेना (UBT) जम्मू-कश्मीर के प्रदेश प्रमुख मनीष साहनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में केंद्र सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को घेरा। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 के बड़े राजनीतिक बदलावों के समय जम्मू की जनता से यह वादा किया गया था कि क्षेत्र का क्षेत्रीय भेदभाव पूरी तरह समाप्त होगा, संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाएगा और जम्मू का सम्मान बहाल होगा। हालांकि, पूरे सात साल बीत जाने के बाद भी जम्मू राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक मोर्चे पर उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
साहनी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, “पांडवों की तरह जम्मू को भी अपनों ने ही छला है।” उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जम्मू-कश्मीर सीधे तौर पर केंद्र शासित प्रदेश है, तब भी यदि जम्मू के साथ लगातार अन्याय और उपेक्षा हो रही है, तो इसकी जवाबदेही निश्चित रूप से केंद्र सरकार और जम्मू के नाम पर जनादेश प्राप्त करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की होनी चाहिए।
जनसांख्यिकीय संतुलन और बाहरी दखल का मुद्दा पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि जम्मू के जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़ने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान अवैध रूप से बढ़ रही रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी पर गहरी चिंता जताई गई। वक्ताओं का कहना था कि स्थानीय संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और बाहरी कंपनियों तथा ठेकेदारों का बढ़ता वर्चस्व क्षेत्र के मूल नागरिकों के सामाजिक एवं आर्थिक हितों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
आर्टिकल 371 के तहत सुरक्षा की मांग शिवसेना नेताओं ने स्पष्ट किया कि अब जम्मू को केवल मौखिक आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस संवैधानिक अधिकारों की जरूरत है। संगठन ने मांग की है कि जम्मू को अलग पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। इसके अलावा, संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत भूमि, सरकारी नौकरियों, स्थानीय व्यापार और प्राकृतिक संसाधनों पर केवल मूल निवासियों के अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए।
- जमीन की सुरक्षा: नागालैंड और मिजोरम की तर्ज पर जम्मू-कश्मीर में भी डोमिसाइल कानून को मजबूत संवैधानिक सुरक्षा मिले।
- नौकरी और आरक्षण: स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष आरक्षण का प्रावधान हो।
- सांस्कृतिक पहचान: डोगरी, कश्मीरी और गुज्जर-बकरवाल जैसे स्थानीय समुदायों की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को पुख्ता मान्यता मिले।
युवाओं और छात्रों से बड़ा आह्वान कार्यक्रम के अंत में युवाओं और छात्रों से इस आंदोलन में खुलकर आगे आने की अपील की गई। मनीष साहनी ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि देश और समाज के हर बड़े बदलाव की अगुवाई हमेशा युवाओं ने ही की है। अब समय सिर्फ दर्शक बनकर बैठने का नहीं है, बल्कि खुद नेतृत्व संभालकर जम्मू के गौरव, सम्मान और अधिकारों की इस निर्णायक लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने का है।







