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On: August 17, 2026 12:50 PM

सपा प्रमुख अखिलेश यादव की कितनी है संपत्ति? जानिए मुलायम सिंह के साम्राज्य की कहानी, कब बनाई थी पार्टी?

Akhilesh Yadav Property: अखिलेश यादव ने 2024 के चुनावी हलफनामे में करीब ₹42.02 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी. उनके पिता मुलायम सिंह यादव के 2019 हलफनामे में करीब ₹20.56 करोड़ की संपत्ति दर्ज थी. दोनों की कहानी संपत्ति के साथ सैफई की मजबूत राजनीतिक विरासत से जुड़ी है.

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Akhilesh Yadav Net Worth

Akhilesh Yadav Net Worth: सैफई की मिट्टी से निकली समाजवादी राजनीति की कहानी में आज सबसे बड़ा नाम अखिलेश यादव का है. पिता मुलायम सिंह यादव ने जिस सियासी जमीन को खड़ा किया, अखिलेश उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. लेकिन इस राजनीतिक विरासत के साथ उनकी अपनी संपत्ति और कमाई की कहानी भी काफी दिलचस्प है. आखिर अखिलेश यादव कितने करोड़ के मालिक हैं और मुलायम सिंह यादव अपने पीछे कैसी विरासत छोड़ गए? आइए, आंकड़ों के साथ पूरी कहानी समझते हैं.

दरअसल, अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को सैफई, इटावा में हुआ. वे मुलायम सिंह यादव और मालती देवी के बेटे हैं. पढ़ाई के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2000 में पहली बार लोकसभा पहुंचे. इसके बाद वे कई बार सांसद रहे. 2012 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री के रूप में पहचान बनाई. आज वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. पार्टी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2017 से संगठन की कमान उनके पास है. यानी सैफई से निकला यह सफर परिवार की पहचान से शुरू होकर अपनी अलग राजनीतिक पहचान तक पहुंचा.

डिंपल से शादी की कहानी
अखिलेश यादव और डिंपल यादव की शादी 24 नवंबर 1999 को हुई थी. उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल में भी यही तारीख दर्ज है. डिंपल मूल रूप से सैन्य परिवार से आती हैं और दोनों की मुलाकात पढ़ाई के दौर में हुई थी. बाद में दोस्ती रिश्ते में बदली और परिवार की सहमति से दोनों ने शादी की. इस कहानी के कई किस्से अलग-अलग जगहों पर मिलते हैं, लेकिन हर किस्से को पक्के तथ्य की तरह लिखना ठीक नहीं होगा. आधिकारिक रिकॉर्ड इतना जरूर साफ करता है कि दोनों की शादी 1999 में हुई और उनके तीन बच्चे हैं, अदिति तथा जुड़वां अर्जुन और टीना.

अखिलेश यादव की नेटवर्थ
सबसे पहले बात अखिलेश यादव की करें. 2024 लोकसभा चुनाव में कन्नौज से दाखिल उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब ₹42.02 करोड़ थी. साथ ही करीब ₹99.85 लाख की देनदारियां भी दर्ज थीं. यानी सिर्फ संपत्ति देखकर पूरी आर्थिक तस्वीर समझना ठीक नहीं होगा, क्योंकि देनदारियां भी अलग से देखनी पड़ती हैं. हलफनामे में उनका पेशा कृषि, जनहित कार्य और वेतन बताया गया है. उनकी संपत्ति 2019 में करीब ₹37.78 करोड़ और 2022 में करीब ₹40.15 करोड़ घोषित हुई थी. यानी चुनावी दस्तावेजों में समय के साथ संपत्ति बढ़ती दिखती है.

एक साल में कितना कमाते हैं
अखिलेश यादव की संपत्ति और उनकी सालाना आय को एक ही चीज समझना ठीक नहीं है. 2024 के हलफनामे में दर्ज आयकर रिटर्न के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में उनकी कुल आय ₹84.51 लाख से ज्यादा थी. इससे पहले 2021-22 में यह करीब ₹1.01 करोड़ रही थी. 2020-21 में करीब ₹83.98 लाख और 2019-20 में करीब ₹83.56 लाख की आय दिखाई गई. इसलिए यह कहना कि उनकी नियमित सालाना कमाई करीब डेढ़ करोड़ रुपये है, उपलब्ध ताजा हलफनामे से सीधे साबित नहीं होता. चुनावी हलफनामा उस समय की घोषित आर्थिक स्थिति बताता है, जबकि बाजार मूल्य और वास्तविक मौजूदा स्थिति अलग हो सकती है.

जमीन मकान भी संपत्ति में
अखिलेश यादव के हलफनामे में चल और अचल संपत्तियों का अलग-अलग ब्योरा दिया गया है. इसमें कृषि और गैर-कृषि जमीन, मकान, बैंक जमा तथा दूसरी वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं. यही वजह है कि किसी नेता की कुल संपत्ति को सिर्फ बैंक खाते या नकद रकम देखकर नहीं समझा जा सकता. हलफनामे में जो संपत्ति दिखाई जाती है, वह उम्मीदवार की ओर से घोषित मूल्य पर आधारित होती है. समय बीतने के साथ जमीन और मकान की बाजार कीमत बदल सकती है. गांव-देहात की भाषा में कहें तो कागज पर दर्ज कीमत और आज के बाजार भाव में फर्क होना कोई अचरज की बात नहीं है.

अब बात मुलायम की विरासत
अब कहानी के दूसरे बड़े किरदार मुलायम सिंह यादव पर आती है. मुलायम सिंह का जन्म 22 नवंबर 1939 को सैफई में हुआ था. किसान परिवार से निकले मुलायम ने राजनीति में लंबा सफर तय किया. वे तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री भी बने. लेकिन उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान समाजवादी पार्टी के संस्थापक के रूप में बनी. 4 अक्टूबर 1992 को उन्होंने समाजवादी पार्टी की स्थापना की. सैफई से निकली उनकी राजनीति ने उत्तर प्रदेश में एक मजबूत संगठन और बड़ा सामाजिक आधार तैयार किया, जिसकी राजनीतिक विरासत आगे अखिलेश यादव तक पहुंची.

मुलायम की संपत्ति कितनी थी
मुलायम सिंह यादव की संपत्ति को लेकर भी अलग-अलग खबरों में अलग आंकड़े मिलते हैं. सबसे भरोसेमंद सार्वजनिक चुनावी दस्तावेज के तौर पर 2019 लोकसभा हलफनामा देखें तो उसमें उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब ₹20.56 करोड़ थी और करीब ₹2.20 करोड़ की देनदारियां दर्ज थीं. उनकी अचल संपत्तियों में जमीन और मकान शामिल थे. इसलिए ₹16.52 करोड़ वाले आंकड़े को 2019 की कुल संपत्ति कहना सही नहीं होगा. उस समय उनके हलफनामे में संपत्तियों का अलग-अलग मूल्य भी दर्ज था. चुनावी हलफनामा किसी व्यक्ति की उस तारीख की घोषित संपत्ति बताता है, इसे पूरे परिवार की कुल दौलत या राजनीतिक प्रभाव का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए.

सैफई से बनी राजनीतिक ताकत
मुलायम सिंह यादव की कहानी सिर्फ जमीन-जायदाद के आंकड़ों की कहानी नहीं है. सैफई जैसे गांव से निकलकर उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसा संगठन खड़ा किया, जिसका असर दशकों तक दिखाई दिया. समाजवादी पार्टी की स्थापना 4 अक्टूबर 1992 को हुई और बाद में यही पार्टी उत्तर प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल हुई. मुलायम ने मुख्यमंत्री से लेकर रक्षा मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाली. उनके राजनीतिक जीवन में परिवार और संगठन दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण रही. आखिरी दौर में पार्टी की कमान अखिलेश यादव के हाथ आई और जनवरी 2017 से अखिलेश समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं. यही इस राजनीतिक विरासत का सबसे अहम अध्याय है.

परिवार की राजनीति से आगे
अखिलेश यादव को राजनीति विरासत में मिली, यह बात छिपी नहीं है. लेकिन उनकी अपनी राजनीतिक यात्रा भी अलग रही है. वे सांसद बने, फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और बाद में समाजवादी पार्टी की कमान संभाली. 2024 में कन्नौज से लोकसभा चुनाव जीतकर उन्होंने संसद में वापसी की. दूसरी तरफ उनकी पत्नी डिंपल यादव भी राजनीति में सक्रिय हैं. इस परिवार की कहानी में सैफई, इटावा और लखनऊ लगातार जुड़े नजर आते हैं. गांव की चौपाल से लेकर राजधानी की राजनीति तक यादव परिवार का असर उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय से दिखाई देता रहा है. यही वजह है कि उनकी संपत्ति के साथ राजनीतिक विरासत पर भी चर्चा होती है.

संपत्ति और विरासत अलग बातें
पूरी कहानी को एक लाइन में समझें तो अखिलेश यादव की 2024 में घोषित व्यक्तिगत संपत्ति ₹42.02 करोड़ है, जबकि मुलायम सिंह यादव के 2019 के हलफनामे में करीब ₹20.56 करोड़ की संपत्ति दर्ज थी. मगर इसे परिवार के पूरे आर्थिक साम्राज्य का हिसाब कहना सही नहीं होगा. चुनावी हलफनामे व्यक्तिगत उम्मीदवार की घोषित संपत्ति का दस्तावेज होते हैं. दूसरी तरफ मुलायम की असली राजनीतिक विरासत पार्टी, संगठन और सैफई से निकली राजनीतिक पहचान है. अखिलेश ने उसी विरासत को आगे बढ़ाया, लेकिन अपनी राजनीतिक पहचान भी बनाई. इसलिए इस कहानी को सिर्फ करोड़ों रुपये में नहीं, बल्कि राजनीति, परिवार और लंबे सार्वजनिक जीवन के संदर्भ में देखना ज्यादा सही रहेगा.

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