2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों से चल रही है. सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी सियासी सब्जी पकानी शुरू कर दी है. इन्हीं बीच नेता अपने-अपने जातिगत वोटों के समीकरण भी सेट करने लगे हैं. इसी पर TV21 Network की टीम प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रही है, कि किस मंडल के किस जिले की किस विधानसभा सीट पर कैसा जाति समीकरण है. साथ ही पिछले चुनावों के गणित के जरिए बताते हैं, कि 2027 में होने वाले चुनाव में कैसा माहौल रहने वाला है. आइए आज हम आपको कानपुर के बाद आगरा मंडल का हाल बता रहे हैं.
दरअसल, हम बात आगरा जिले की कर रहे हैं. वैसे तो आगरा मंडल में चार जिले आते हैं. इनमें आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी शामिल हैं. लेकिन आज हम आपको आगरा जिले की सभी विधानसभा सीटों के जाति समीकरण के बारे में बताएंगे. बाकी तीन जिलों के आंकड़े अलग-अलग दिन बताएंगे. आइए आगरा जिले की 9 विधानसभा सीटों का गणित समझते हैं, कि किस सीट पर बीजेपी या समाजवादी पार्टी का पलड़ा भारी है.
2017-2022 के आगरा विधानसभा चुनाव परिणाम
चलिए सबसे पहल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों पर नजर डाल लेते हैं, कि आगरा जिले की किस विधानसभा सीट पर किस पार्टी के किस नेता ने अपनी जीत दर्ज की थी.
- अगरा उत्तर विधानसभा सीट (Agra North)
2017: बीजेपी से जगन प्रसाद गर्ग जीते थे.
2022: बीजेपी से पुरुषोत्तम खंडेलवाल जीते थे. - आगरा दक्षिण विधासभा सीट (Agra South)
2017: बीजेपी से योगेंद्र उपाध्याय
2022: दोबारा योगेंद्र उपाध्याय - आगरा कैंट विधानसभा सीट (Agra Cantt)
2017: डॉ. गिरिराज सिंह धर्मेश (BJP)
2022: दोबारा डॉ. गिरिराज सिंह धर्मेश - आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट (Agra Rural)
2017: बीजेपी से हेमलता दिवाकर
2022: बीजेपी से बेबी रानी मौर्य - एतमादपुर विधानसभा सीट (Etmadpur)
2017: बीजेपी से राम प्रताप सिंह चौहान
2022: बीजेपी से धर्मपाल सिंह - फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट (Fatehpur Sikri)
2017: बीजेपी से चौधरी उदयभान सिंह
2022: बीजेपी से चौधरी बाबूलाल - खेरागढ़ विधानसभा सीट (Kheragarh)
2017: बीजेपी से महेश कुमार गोयल
2022: बीजेपी भगवान सिंह कुशवाहा - फतेहाबाद विधानसभा सीट
2017: बीजेपी के जितेंद्र वर्मा जीते थे.
2022: बीजेपी से छोटालाल वर्मा थे. - बाह विधानसभा सीट (Bah)
2017: बीजेपी से रानी पक्षालिका सिंह
2022: बीजेपी से रानी पक्षालिका सिंह
आगरा की किस सीट पर कैसा समीकरण?
अब आगरा जिले की सभी सीटों पर सभी जातियों का मिला जुला असर है. यहां पर सामान्य वर्ग, ओबीसी, अनुसूचित जाति रहती है. इनमें ब्राह्मण, जाटव (एससी), ठाकुर (क्षत्रिय), मुस्लिम, वैश्य और यादव बताई जा रही हैं. आंकड़ों की मानें तो ब्राह्मण और जाटव मतदाता सबसे ज्यादा बताए जाते हैं. इसके अलावा, एत्मादपुर, बाह, खेरागढ़ और आगरा दक्षिण जैसी सीटों पर ठाकुर, वैश्य, बघेल और मुस्लिम वोटर भी हार-जीत को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा, वाल्मीकि, कोरी जैसे गैर-जाटव दलित समुदाय भी यहां बड़ी संख्या में रहते हैं. चलिए आपको हम अलग-अलग सीटों का समीकरण बताते हैं.
- आगरा दक्षिण (Agra South Chunav 2027)
वैसे तो साउथ आगरा में 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का पलड़ा भारी लग रहा है. क्योंकि पिछले तीन चुनावों 2012, 2027, 2022 में बीजेपी का उम्मीदवार ही परचम लहरा रहा है. आगरा दक्षिण मुख्य रूप से शहरी इलाका माना जाता है. यहां पर सामान्य वर्ग एकजुट होकर बीजेपी का समर्थन करता है.
जातीय समीकरण
सामान्य वर्ग (1,10,000)
ब्राह्मणः 40 हजार
पंजाबीः 35 हजार
वैश्य/बनियाः 25 हजार
ओबीसीः 36 हजार
एससी (जाटव, वाल्मीकि, कोरी): 78 हजार
मुस्लिमः 65 हजार
- आगरा उत्तर (Agra North Chunav 2027)
आगरा उत्तर में भी 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बढ़त दिखाई दे रही है. क्योंकि यह क्षेत्र व्यापारियों और सवर्ण समाज का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता है. यहां पर भी 2022 में बीजेपी की बड़ी जीत हुई थी. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां पर बनिया, सिंधी, पंजाबी और ब्राह्मण वोटर बड़ी तादाद में रहते हैं. इन सभी को बीजेपी के कोर वोटर के रूप में जाना जाता है. - आगरा कैंट (Agra Cantt Chunav2027) – सुरक्षित सीट
आगरा कैंट भी 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में जा सकती है. इसकी भी सबसे बड़ी वजह सवर्ण और व्यापारी वर्ग माना जाता है. सबसे खास बात यह है कि यहां पर सपा का आज तक खाता नहीं खुल पाया है. यहां पर सबसे ज्यादा दलित (जाटव-गैर जाटव ) का सबसे बड़ा वोट बैंक है. इसके अलावा, यहां पर पंजाबी, साहू (वैश्य) और ब्राह्मण वोटर जीत की भूमिका निभाते हैं. - आगरा ग्रामीण (Agra Rural Chunav 2027) – सुरक्षित सीट
आगरा ग्रामीण में बीजेपी, सपा और कांग्रेस में कड़ा मुकाबला हो सकता है. लेकिन बीजेपी की 2022 में बड़ी जीत हुई थी. यहां से बीजेपी से बेबी रानी मौर्य विधानसभा पहुंची थी. सबसे बड़ी बात यह है कि ग्रामीण इलाका के साथ साथ सत्ता विरोधी लहर और किसानों के मुद्दे पर सपा का असर भी दिखा था लेकिन उसके बाद भी बीजेपी ने अपना परचम लहराया था. इस सीट पर दलित समुदाय के साथ जाट, राजपूत (ठाकुर) और ओबीसी जातियां (बघेल, लोधी, कुशवाहा) का गढ़ माना जाता है. अगर यहां पर दलित और जाट सपा गठबंधन की तरफ झुकते हैं, तो मुकाबला रोचक हो सकता है. - फतेहाबाद (Fatehabad Chunav 2027)
2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी का दबदबा देखने को मिल सकता है. क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा सीट से सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी ने काफी बढ़त बनाई थी. बताया जाता है कि यहां के राजपूत और ओबीसी वोटर ने बीजेपी विधायक के खिलाफ काफी नाराजगी जताई है. हालांकि, इस सीट पर राजपूत (ठाकुर), ब्राह्मण, निषाद वोटर काफी बड़ी संख्या में हैं. साथ ही यादव, मुस्लिम वोटर के जुड़ने से सपा का समीकरण अलग दिखा दे सकता है. - बाह (Bah Chunav 2027)
बाह विधानसभा 2027 के चुनाव में बहुत ही करीबी मुकाबला हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां भदावर राजघराने का गढ़ माना जाता है. वर्तमान में यहां से बीजेपी की रानी पक्षालिका सिंह विधायक हैं. लेकिन 2024 के आम चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने बाह विधानसभा इलाके में अप्रत्याशित जीत हासिल की थी. इसके बाद से बीजेपी की चिंताएं बढ़ गई हैं. बाह में छत्रिय यानी ठाकुर-राजपूत बाहुल्य इलाका माना जाता है. इनके अलावा, ब्राह्मण और ओबीसी वोट जीत तय करते हैं. - फतेहपुर सीकरी (Fatehpur Sikri Chunav 2027)
फतेहपुर सीकरी में समाजवादी पार्टी को बढ़त दिख रही है. यहां पर जाट-गुर्जर वोटरों में बीजेपी के खिलाफ काफी रोष देखने को मिल रहा है. इसका फायदा सपा को हो सकता है. यहां पर जाट, राजपूत, बघेल वोटर काफी बड़ी तादाद में बताए जाते हैं. अगर जाट और मुस्लिम वोटरों का झुकाव सपा की तरफ होता है, तो साइकिल की रफ्तार तेज हो सकती है. - एतमादपुर (Etmadpur Chunav 2027)
वहीं एतमादपुर विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है. यहां पर 2022 में बीजेपी के धर्मपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी. इस बार स्थानीय और रोजगार जैसे मुद्दों पर युवा वर्ग बीजेपी से नाराज चल रहा है. बात करें जातीय समीकरण की तो बघेल, ठाकुर, ब्राह्मण और जाटव मतदाताओं की बड़ी आबादी है. किसी एक जाति का इतना वजूद नहीं है कि जीत-हार तय कर सके. - खेरागढ़ (Kheragarh Chunav 2027)
खेरागढ़ में भी समाजवादी पार्टी का पलड़ा भारी दिख रहा है. क्योंकि यह इलाका राजस्थान से सटा है, यहां पर रहने वाले ग्रामीण सरकार पर हावी हैं. लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से यहां विपक्ष का ग्राफ बढ़ा दिखाई दिया था. यहां पर सपा का पीडीए कार्ड काफी प्रभावी दिखाई देता है. बात करें जातीय समीकरण की, तो जाट, ठाकुर और कुशवाहा (मौर्य) मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा बताई जाती है. यहां पर कुशवाहा और अन्य अति पिछड़ी जातियों को अपने पाले में करने के लिए सपा लगातार कोशिशें कर रही हैं.
वैसे तो आगरा को उत्तर भारत में दलितों की राजधानी के रूप में जाना जाता है. 2027 में होने वाले चुनावों में सबसे बड़ा उलटफेर जाटव मतदाता कर सकते हैं. क्योंकि बसपा के कमजोर होने के बाद समाजवादी पार्टी हर विधानसभा सीट पर 27000 नए वोटर जोड़ने का अभियान चला रही है. अगर दलित वोटर सपा की तरफ जाता है तो ग्रामीण इलाकों में सपा का पलड़ा भारी हो सकता है. अगर बीजेपी की तरफ जाते हैं या फिर बसपा अपना कोर वोट बचा पाती है, तो बीजेपी को बढ़त हो सकती है.
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3 thoughts on “BJP या सपा… आगरा में किसका चलेगा जादू? 2027 चुनाव से पहले समझिए 9 सीटों का जातीय समीकरण”