लखनऊ विधानसभा चुनाव-2027 के लिए चुनावी रोटियां सिकनी शुरू गई हैं. सभी पार्टियों के नेताओं ने अपना-अपना गणित लगाना शुरू कर दिया है. लखनऊ की सभी 9 विधानसभा सीटों पर बीजेपी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी से लेकर छोटी-बड़ी पार्टियों का कैसा जातीय समीकरण है. आइए आपको हम सभी अलग-अलग सीटों के बारे में बताते हैं.
वर्तमान में लखनऊ की सभी 9 सीटों में से सात सीटों पर बीजेपी ने अपना कब्जा जमा रखा था. वहीं समाजवादी पार्टी ने सिर्फ 2 सीटों पर जीत दर्च की थी. यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में कहां किसने जीत दर्ज की थी.
- मलिहाबाद सीट से बीजेपी जीती
- बक्शी का तालाबा में बीजेपी से योगेश शुक्ला
- सरोजनीनगर से बीजेपी के राजेश्वर सिंह
- लखनऊ पश्चिम सीट से समाजवादी पार्टी के अरमान खान
- लखनऊ उत्तर से बीजेपी के डॉक्टर नीरज बोरा
- लखनऊ पूर्व से बीजेपी के आशुतोष टंडन जीते थे.
- लखनऊ मध्य सीट पर बीजेपी की रविदाश मेहरोत्रा
- लखनऊ कैंट सीटे से बीजेपी के ब्रजेश पाठक
- मोहनलालगंज से अमरेश कुमार जीते
वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की थी. लखनऊ की 9 सीटों पर 8 सीटों पर बीजेपी ने कब्जा किया था. जबकि 1 सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी हासिल की थी.
- मलिहाबाद में बीजेपी की जय देवी
- बक्शी का तालाब से बीजेपी की अविनाश त्रिवेदी
- सरोजनीनगर सीट से बीजेपी की स्वाति सिंह
- लखनऊ पश्चिम से बीजेपी से सुरेश कुमार श्रीवास्तव
- लखनऊ उत्तर सीट से बीजेपी के डॉक्टर नीरज बोरा
- लखनऊ पूर्व से बीजेपी के आशुतोष टंडन गोपाल जी
- लखनऊ मध्य से ब्रजेश पाठक जीते थे.
- लखनऊ कैंट सीट से बीजेपी के रीता बहुगुणा जोशी जीते
- मोहनलालगंज सीट से अमरेश कुमार (सपा समर्थित)
लखनऊ की 9 विधानसभा सीटों का जातीय समीकरण
मलिहाबाद (सुरक्षित-SC): लखनऊ की मलिहाबाद सीट पर पासी, दलित के साथ साथ ओबीसी (यादव, लोदी, कुइरी) और सवर्ण मतदाता जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
बक्शी का तालाब (BKT Chunav 2027): बक्शी का तालाब विधानसभा सीट पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, यादव, पासी और मुस्लिम समुदाय बहुत बड़ी संख्या में रहते हैं. यहां पर ग्रामीण और अर्ध-नगरीय मिला जुला असर रहता है.
सरोजनी नगरः लखनऊ की सरोजनी नगर विधानसभा सीट काफी बड़ी मानी जाती है. यहां पर क्षत्रिय, ब्राह्मण, यादव, वैश्य और दलित वोटरों की जीत हार में बड़ी भूमिका मानी जाती है.
लखनऊ पश्चिमः इस विधानसभा सीट पर मुस्लिम वोटरों को सबसे बड़ा और निर्णायक माना जाता है. यहां पर कुल 4.33 लाख वोटरों में से 1.10 लाख मुस्लिम वोटर हैं. इनके अलावा, ब्राह्मण, कायस्थ, वैश्य और पासी मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं.
लखनऊ पूर्वः लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट पर बीजेपी का हमेशा से कब्जा रहा है. यहां पर कुल 4.51 लाख वोटरों में 65000 ब्राह्मण, 70000 क्षत्रिय के साथ-साथ कायस्थ, वैश्य और दलित-मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं.
लखनऊ मध्यः लखनऊ मध्य विधानसभा सीट पर मुस्लिम और वैश्य का कब्जा है. हालांकि, यहां पर ब्राह्मण, कायस्थ और सिंधी वोटर भी चुनावी नतीजों को इधर-उधर कर सकते हैं.
लखनऊ कैंटः इस सीट पर ब्राह्मण, पंजाबी, सिंधी, क्षत्रिय और कायस्थ मतदाताओं का काफी दबदबा रहता है. यह सीट बीजेपी की गढ़ मानी जाती है.
मोहनलालगंज सीटः यह सीट ग्रामीण सुरक्षित सीट मानी जाती है. यहां पर पासी, रावत और अन्य अनुसूचित जाति के वोटरों के साथ यादव, ब्राह्मण और लोधी मतदाता हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं.
माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ की सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला हो सकता है. इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं, कि सभी 9 सीटों के जातीय समीकरण बीजेपी-सपा दोनों की हार जीत तय करते हैं.
लखनऊ उत्तरः लखनऊ उत्तरी विधानसभा सीट को शहरी सीट माना जाता है. यहां पर बीजेपी का दबदबा कायम है. इस सीट पर ब्राह्मण, कायस्थ, वैश्य और पंजाबी वोटरों का सबसे ज्यादा प्रभाव माना जाता है. साथ ही मुस्लिम-दलित वोट भी काफी बड़ी तादाद में रहते हैं.
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समझिए पूरा जातीय समीकरण
ब्राह्मण और सवर्ण मतदाता: लखनऊ की कई शहरी सीटों पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, और वैश्य जैसे सवर्ण वोटरों की संख्या बड़ी तादाद में है. ये सभी मतदाता बीजेपी की जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं. इनमें लखनऊ उत्तर, लखनऊ पश्चिम, लखनऊ पूर्व और लखनऊ सेंट्रल सीट शामिल हैं.
पिछड़ा वर्ग (OBC): ओबीसी वर्ग में आने वाले यादव, कुर्मी, मौर्य, निषाद और लोधी राजधानी के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हार-जीत तय करते हैं. समाजवादी पार्टी अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के जरिए इस वर्ग को साधने में जुटी है, जबकि बीजेपी गैर-यादव ओबीसी वोटों को अपने पाले में करने के लिए जाल बिछा रही है.
दलित समुदाय: बात करें दलित समुदाय की, तो इनमें जाटव और गैर-जाटव दलित मतदाता भी लखनऊ की कुछ सीटों पर हार-जीत तय करते हैं. अगर बीएसपी और अन्य दल इनमें पकड़ बनाते हैं, तो उनकी जीत तय हो सकती है. वहीं मुस्लिम वोटर लखनऊ के कई इलाकों में अच्छी खासी संख्या में मौजूद हैं. मुस्लिम वोटर सपा के पक्ष में ज्यादा नजर आ रहे हैं.
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