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On: October 29, 2026 11:42 AM

सबसे पहले किसने किया था करवाचौथ व्रत? जानिए पौराणिक कथाओं के पीछे की कहानी

करवाचौथ का व्रत सबसे पहले किसने रखा था? माता पार्वती और द्रौपदी से जुड़ी पौराणिक कथाएं क्या कहती हैं? जानिए करवाचौथ की शुरुआत की मान्यता, व्रत का महत्व और चंद्रमा की पूजा करने की वजह.

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करवाचौथ का नाम आते ही हाथों में मेहंदी, सजी हुई पूजा की थाली और चांद निकलने का इंतजार करती महिलाओं की तस्वीर सामने आ जाती है. उत्तर भारत के कई घरों में यह त्योहार पति-पत्नी के रिश्ते और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से जुड़ा है. इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और शाम को पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं. आइए जानते हैं इन कथाओं में क्या बताया गया है और करवाचौथ पर चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है.

धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पौराणिक कथाओं में माता पार्वती को करवाचौथ के व्रत से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए यह व्रत किया था. हालांकि, अलग-अलग धार्मिक कथाओं में इस व्रत की शुरुआत को लेकर अलग-अलग प्रसंग मिलते हैं. इसलिए माता पार्वती को ही इसका सबसे पहला व्रत रखने वाला बताना एक धार्मिक मान्यता के रूप में समझना चाहिए, न कि प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में.

माता पार्वती ने किया था सबसे पहले व्रत

एक प्रचलित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में देवताओं और दानवों के बीच भयंकर युद्ध हुआ. युद्ध में देवताओं की परेशानी देखकर ब्रह्मदेव ने उनकी पत्नियों को व्रत रखने का सुझाव दिया. इसके बाद देवपत्नियों ने कार्तिक मास की चतुर्थी पर व्रत किया. धार्मिक कथा के मुताबिक, इस व्रत के बाद देवताओं को युद्ध में विजय मिली.

इस कथा को करवाचौथ के व्रत की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि, इस प्रसंग के अलग-अलग रूप प्रचलित हैं और इसे इतिहास की प्रमाणित घटना नहीं माना जा सकता.

ये भी पढ़ेंः क्या तलाकशुदा महिलाएं कर सकती हैं करवाचौथ की पूजा? जानिए क्या हैं परंपराएं

द्रौपदी ने भी रखा था करवाचौथ जैसा व्रत?

करवाचौथ से जुड़ी एक अन्य प्रचलित कथा महाभारत काल की द्रौपदी के बारे में है. कथा के अनुसार, जब अर्जुन तपस्या करने के लिए नीलगिरि पर्वत की ओर गए, तब पांडवों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. ऐसी स्थिति में द्रौपदी ने भगवान कृष्ण से मार्गदर्शन मांगा.

मान्यता के मुताबिक, भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को व्रत करने की सलाह दी. इसके बाद द्रौपदी ने श्रद्धा के साथ व्रत किया और पांडवों की परेशानियां दूर होने की बात इस कथा में बताई जाती है.

हालांकि, इस प्रसंग को करवाचौथ के मौजूदा स्वरूप से जोड़ने वाली कथा प्रचलित धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा है. इसे महाभारत के सभी संस्करणों में वर्णित करवाचौथ की प्रमाणित ऐतिहासिक शुरुआत के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा.

ये भी पढ़ेंः करवाचौथ पर निर्जला या नॉर्मल व्रत? किसकी होती है पूजा, चंद्रमा को अर्घ्य देने की क्या है मान्यता

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