अयोध्याः कारगिल की लड़ाई में देश के लिए मोर्चा संभालने वाले पूर्व सैनिक भवानी प्रसाद तिवारी आज अपने ही मकान को बचाने के लिए बेबस नजर आ रहे हैं। गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र के रामनगर स्थित तिवारी का पुरवा से गुजर रहे प्रयागराज-अयोध्या सिक्स लेन की जद में उनका मकान आ गया है। परिवार का आरोप है कि सड़क निर्माण के लिए घर के भीतर तक निशानदेही कर दी गई है, जबकि पश्चिमी दिशा में जंगल और खेत की पर्याप्त खाली जमीन मौजूद है।
इस मामले ने सड़क निर्माण की कार्ययोजना और मकानों को बचाने के विकल्पों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भवानी प्रसाद तिवारी के परिवार में चार भाई पूर्व सैनिक हैं। इसके बावजूद परिवार अपने मकान को बचाने के लिए अधिकारियों के सामने गुहार लगाने की तैयारी कर रहा है। परिवार का दावा है कि सिक्स लेन के मौजूदा घुमाव के कारण तिवारी का पुरवा में दर्जनों मकान प्रभावित हो सकते हैं।
जंगल-खेत की जमीन उपलब्ध
भूतपूर्व सैनिक भवानी प्रसाद तिवारी का आरोप है कि सड़क निर्माण के लिए अपनाए गए मार्ग में ऐसा घुमाव दिया गया है, जिससे आबादी के मकान इसकी जद में आ रहे हैं। उनका कहना है कि पश्चिम की ओर जंगल और खेत की जमीन उपलब्ध है। परिवार का कहना है कि, सड़क निर्माण के लिए जितनी जमीन की जरूरत है, उससे अधिक जमीन वहां खाली पड़ी है। इसके बावजूद आबादी की ओर सड़क निकालने से लोगों के घर उजड़ने की नौबत आ गई है।
भवानी प्रसाद तिवारी का आरोप है कि मार्ग में पड़ रही एक प्लाई फैक्ट्री को बचाने के लिए सिक्स लेन का रुख तिरछा किया गया है। इसी बदलाव के कारण उनके सहित कई परिवारों के मकान प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि,सड़क की निर्धारित रूपरेखा, प्लाई फैक्ट्री की स्थिति और मार्ग में बदलाव के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
घर को बचाने के लिए बेबस
भवानी प्रसाद तिवारी अपनी पीड़ा बताते हुए कहते हैं कि उन्होंने कारगिल की लड़ाई में हिस्सा लिया था। देश की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन अब अपने ही घर को बचाने के लिए बेबस हैं। उनका सवाल है कि जब पश्चिम की ओर पर्याप्त खाली जमीन मौजूद है, तो आबादी के बीच से सड़क निकालने की जरूरत क्यों पड़ रही है?उनके भाई सेवानिवृत्त सूबेदार अयोध्या प्रसाद तिवारी भी सड़क के घुमाव को लेकर सवाल उठाते हैं। उनका कहना है कि धनुष के आकार में प्रयागराज-अयोध्या सिक्स लेन निकाले जाने से गांव के मकान प्रभावित हो रहे हैं।
परिवार का आरोप है कि निर्माण एजेंसी की कार्रवाई से उनकी परेशानी बढ़ी है और अब तक कोई जनप्रतिनिधि उनकी समस्या का समाधान निकालने के लिए आगे नहीं आया है। परिवार के एक अन्य भाई माता प्रसाद तिवारी का कहना है कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि लोगों के घर बचाने से ज्यादा प्राथमिकता प्लाई फैक्ट्री को बचाने को दी जा रही है। उनका कहना है कि यदि सड़क के मार्ग में बदलाव की गुंजाइश है, तो प्रभावित परिवारों के मकानों को बचाने के विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
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गांव के कई परिवार परेशान
सिक्स लेन की जद में मकान आने की आशंका से गांव के दूसरे परिवार भी परेशान हैं। गांव की एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि यदि उनका घर नहीं बचा, तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव में वोट भी नहीं देंगी। अन्य महिलाओं ने भी अपने मकान उजड़ने की आशंका और परिवार के भविष्य को लेकर चिंता जताई।पूर्व सैनिक परिवार का कहना है कि वह पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात करेगा और सड़क निर्माण की निर्धारित रूपरेखा की समीक्षा कराते हुए अपनी समस्या रखेगा।
परिवार चाहता है कि निर्माण एजेंसी मौके का दोबारा निरीक्षण करे और यह स्पष्ट करे कि खाली जमीन उपलब्ध होने के बावजूद आबादी के मकानों को सिक्स लेन की जद में क्यों लिया जा रहा है। फिलहाल, प्रभावित परिवारों की मांग है कि सड़क निर्माण से जुड़े अधिकारी मौके की स्थिति की जांच करें और मकानों को बचाने की संभावनाओं पर विचार करें। अब देखना होगा कि प्रशासन और निर्माण एजेंसी परिवार की शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।
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