उत्तर प्रदेश में MLC यानी विधान परिषद की कुल 100 सीटों में से 11 पर चुनाव है. 27 अक्टूबर को इसके नतीजे आने वाले हैं. 2027 में होने वाले विधानसभा इलेक्शन से पहले MLC चुनाव प्रदेश की सभी पार्टियों के लिए काफी अहम है. भले ही विधानसभा चुनाव 2027 में होने वाला हो, लेकिन MLC चुनाव में बीजेपी-सपा ने अपने-अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है.
MLC चुनाव का मतलब विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव किया जाता है. जिस तरह से देश को चलाने के लिए दो सदन होते हैं. ठीक उसी प्रकार से प्रदेश में भी दो सदन होते हैं. लेकिन देश के सिर्फ 6 राज्यों में दो सदन हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं.
यूपी में कितने सीटों पर चुनाव है ?
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र
- लखनऊ खंड स्नातक
- वाराणसी खंड स्नातक
- आगरा खंड स्नातक
- मेरठ खंड स्नातक
- इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र
- लखनऊ खंड शिक्षक
- वाराणसी खंड शिक्षक
- आगरा खंड शिक्षक
- मेरठ खंड शिक्षक
- बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक
- गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक
कितना अलग है MLC-MLA चुनाव
MLC का चुनाव MLA के बिल्कुल विपरीत होता है. क्योंकि विधायक को जनता सीधे वोट देकर चुनती है. लेकिन विधान परिषद के सदस्यों को आम जनता सीधे वोट नहीं करती है. बल्कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि जैसे विधायक, स्थानीय निकाय, स्नातक, शिक्षक व राज्यपाल ही चुनाव करता है.
एमएलसी-एमएलए में क्या अंतर है
विधान परिषद के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है. इनका चुनाव हर दो साल में एक तिहाई सदस्य बदले जाते हैं. जबकि विधानसभा के सदस्यों का कार्यकाल 5 साल का होता है. विधान परिषद को कभी भी भंग नहीं किया जा सकता है. जबकि विधानसभा 5 साल या फिर उससे पहले भंग की जा सकती है. विधान परिषद एक स्थायी सदन होता है.
MLC-MLA की सैलरी में क्या अंतर
वैसे तो यूपी में MLA-MLC के सदस्यों की सैलरी बराबर बताई जाती है. 1 अप्रैल 2025 को यूपी सरकार द्वारा संशोधित विधेयक के मुताबिक, एक MLA-MLC को लगभग 2.45 लाख से 2.66 लाख रुपए प्रति महीने वेतन के रूप में दिया जाता है. इस वेतन में कई तरह के भत्ते भी शामिल हैं. प्रदेश में 9 साल बाद माननीयों की भत्तों और सैलरी में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है.
बेसिक सैलरीः 35000 रुपए प्रति महीना
निर्वाचन क्षेत्र भत्ताः 75000 रुपए प्रति महीना
मेडिकल भत्ताः 45000 रुपए प्रति महीना
सचिवीय भत्ताः 30000 रुपए प्रति महीना
टेलीफोन भत्ताः 9 हजार रुपए प्रति महीना
दैनिक भत्ताः 2000 प्रति दिन के हिसाब से 60000 रुपए प्रति महीना दिया जाता है.
अन्य भत्ते
दैनिक भत्ताः अगर विधानसभा या विधान परिषद का सत्र के दौरान हर दिन 2500 रुपए प्रति दिन दिया जाता है.
रेलवे कूपनः MLA-MLC को हर साल रेल कूपन 5 लाख सालाना दिया जाता है.
पूर्व विधायकों की पेंशनः पूर्व MLA-MLC की पेंशन भी 35000 रुपए प्रति महीना दी जाती है.
सरकार बनाने-गिराने में किसकी भूमिका?
राज्य की सरकार विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है. विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है. यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद को पद छोड़ना पड़ता है.
विधान परिषद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सरकार को हटाने का अधिकार नहीं है. एमएलसी सवाल पूछकर, बहस में हिस्सा लेकर और सरकार के कामकाज पर चर्चा करके अपनी बात रख सकते हैं.
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राष्ट्रपति-राज्यसभा चुनाव में कौन डालता है वोट?
राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक वोट डालते हैं. विधान परिषद के सदस्य इस चुनाव में मतदान नहीं करते.
राज्यसभा चुनाव में भी राज्यों के निर्वाचित विधायक वोट देते हैं. एमएलसी को राज्यसभा के सदस्यों के चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं है.
इस तरह विधायक और एमएलसी दोनों राज्य की राजनीति और कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन चुनाव का तरीका, कार्यकाल और अधिकार अलग-अलग हैं.
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